श्रीनगर। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) के अध्यक्ष संजय के टिकू ने गैर-प्रवासी कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ जारी नौकरशाही उपेक्षा और राजनीतिक बहिष्कार पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
केपीएसएस ने कहा कि पिछले एक दशक से समिति ने संबंधित अधिकारियों को कई पत्र भेजे हैं, जिसमें गैर-प्रवासी कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए व्यापक नीति तैयार करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने दिसंबर 2014 में कुछ लाभ प्रदान किए थे, लेकिन स्थानीय नेतृत्व, विशेष रूप से प्रवासी कश्मीरी पंडित नेताओं ने इसके कार्यान्वयन में बाधाएं डालीं।
संस्था ने आरोप लगाया कि प्रवासी कश्मीरी पंडित नेताओं ने अपने ही समुदाय के लोगों को धोखा दिया और कश्मीर घाटी में उनके अस्तित्व और अधिकारों को मिटाने की साजिश की। साथ ही, केपीएसएस ने सरकार से उम्मीद जताई कि गैर-प्रवासी कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर ध्यान दिया जाएगा।