श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने बुधवार को पॉक्सो मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के दिए गए फैसले को बरकरार रखा। इसमें एक सेमिनरी शिक्षक को 12 वर्षीय लड़के के यौन उत्पीड़न के लिए दोषी ठहराया गया था। हालांकि, अदालत ने उसकी सजा को सात साल से घटाकर छह साल के साधारण कारावास में बदल दिया।
न्यायमूर्ति राजेश ओसवाल की पीठ ने यह भी कहा कि शिक्षक शबीर अहमद नाइक पर लगाया गया 25,000 रुपये का जुर्माना अपरिवर्तित रहेगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला एफआईआर संख्या 107/2021 के तहत दर्ज किया गया था। इसमें पीड़ित के पिता ने शिकायत की थी कि उसके बेटे के साथ सेमिनरी के एक शिक्षक ने नवंबर 2021 में रात 10 बजे यौन उत्पीड़न किया था।
उच्च न्यायालय ने कहा, इस अदालत ने मजिस्ट्रेट द्वारा पारित निर्णय की समीक्षा की है। ट्रायल कोर्ट ने मुद्दों को बहुत सावधानी से निपटाया है और अपीलकर्ता (शिक्षक) के दोष के सही निष्कर्ष पर पहुंचा है। अदालत ने आगे कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के पास अपीलकर्ता को दोषी ठहराने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।
अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षक जो बच्चों को धार्मिक शिक्षा दे रहा था, ने न केवल पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध किया है, बल्कि उसने छात्र के अपने शिक्षक पर विश्वास को भी तोड़ा है। न्यायालय ने कहा, हालांकि अपीलकर्ता (शिक्षक) को सहानुभूति नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उसने एक जघन्य अपराध किया है, लेकिन यह भी सच है कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इसलिए, अदालत का मानना है कि अपीलकर्ता की 7 साल की सजा को छह साल की साधारण कारावास में घटाना उचित है। अंत में अदालत ने कहा, फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा सात जून 2024 को पारित सजा का आदेश संशोधित किया गया है कि साधारण कारावास की अवधि सात वर्ष के बजाय छह वर्ष होगी। जुर्माने की राशि वही रहेगी।