श्रीनगर। डीजीपी ने कहा कि राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है। कई मामलों में पुलिस ने आतंकवाद और नशीले पदार्थों के बीच सीधे संबध के स्पष्ट सबूत पाए हैं। जम्मू-कश्मीर में एक भी ग्राम नशे का उत्पादन नहीं होता। इसकी आपूर्ति बाहरी क्षेत्रों से होती है। उन्होंने कहा, 2024 में 15 जुलाई तक 307 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 150 में सजा और 157 में बरी किया गया है।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान करती है। हम उन पुलिसकर्मियों को भी पुरस्कार देते हैं जो दस साल पहले से रिटायर हो चुके हैं। नशीले पदार्थों और आतंकवाद के बीच संबंधों के बारे में पूछे जाने पर डीजीपी ने कहा कि पहले दो-तीन सालों में इस संबंध में कोई स्पष्ट सबूत नहीं थे, लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि दोनों के बीच सीधा संबंध है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने जम्मू के सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए गिराए गए नशीले पदार्थों को हथियारों के साथ भी देखा है।
डीजीपी ने यह भी बताया कि पुलिस ने कुछ क्षेत्रों को पहचाना है जहां नशीले पदार्थों का व्यापार बढ़ रहा है, जिनमें जम्मू का सांबा जिला शामिल है। उन्होंने स्वीकार किया कि जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की बढ़ती घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बन गई है।