श्रीनगर। कश्मीर के भेड़पालन विभाग को कथित तौर पर स्थापित मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। चार जूनियर कर्मचारियों को अनिवार्य एक वर्षीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा किए बिना ही विभागीय परीक्षा देने और पदोन्नति के लिए विचार किए जाने की अनुमति दी है।
जम्मू और कश्मीर भेड़पालन विभाग के 2018 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्टॉक सहायक, जूनियर ग्रेडर, जूनियर ऊन कतरने वाले और जूनियर प्रयोगशाला सहायक जैसे कर्मचारियों को उच्च ग्रेड में पदोन्नति के लिए आंतरिक परीक्षाओं में बैठने के लिए पात्र होने से पहले एक वर्ष का अनिवार्य प्रशिक्षण लेना आवश्यक है।
हालांकि, इन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए विभाग के निदेशालय ने चार सहायक स्टॉक मैन और मल्टी-टास्किंग कर्मचारियों को अपना प्रशिक्षण पूरा किए बिना ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। 11 जून, 2025 को जारी आदेश में कहा गया है: “चार एएसएम/एमटीएस अधिकारियों - क़ैसर मंज़ूर, आमिर शफ़ी, मेहराजुद्दीन चोपन और शाह अनायत उल बारी की शियरिंग जांच के लिए अधिकारियों की एक समिति के गठन को मंज़ूरी दी जाती है।
विवाद को और बढ़ाते हुए जांच कराने का काम जिस समिति को सौंपा गया है, वह भी आधिकारिक दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती हुई प्रतीत होती है। आम तौर पर, ऐसी समितियों का नेतृत्व कश्मीर या जम्मू के भेड़पालन विभाग के निदेशकों द्वारा किया जाता है, जिसमें संयुक्त निदेशक (विस्तार), प्रधान प्रशिक्षण संस्थान और अनुसंधान के उप निदेशक की सहायता होती है। इसके बजाय, आदेश में डॉ. अजय कुमार सूदन, संयुक्त निदेशक फ़ार्म, कश्मीर को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। साथ ही जूनियर कर्मचारी, जिसमें जूनियर महामारी विज्ञानी डॉ. इमरान ख्वाजा, शियरिंग इंस्पेक्टर डॉ. राहेका रिज़वी और मास्टर शियरर गया दीन शामिल हैं, ने प्रक्रियागत अनियमितताओं पर चिंता जताई है।
विभाग के कर्मचारियों ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की है, उन्होंने जोर देकर कहा कि परीक्षा और उसके बाद की पदोन्नति को रोक दिया जाना चाहिए क्योंकि वे स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया की नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ये कर्मचारी अपेक्षित प्रशिक्षण पूरा किए बिना पदोन्नति के लिए कैसे पात्र हो सकते हैं? साथ ही, निर्धारित निरीक्षण का पालन किए बिना समिति का गठन संदिग्ध है। यह कुछ व्यक्तियों के पक्ष में पक्षपातपूर्ण प्रतीत होता है। कर्मचारी अब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आग्रह कर रहे हैं।
पदोन्नति और परीक्षा की समीक्षा की जाएगी : निदेशक
भेड़ पालन कश्मीर के निदेशक रफीक अहमद शाह ने कहा कि उन्हें अनिवार्य प्रशिक्षण आवश्यकताओं की जानकारी नहीं थी। इस मामले सहित सभी पदोन्नति और परीक्षाओं की समीक्षा की जाएगी। विभाग अब उन लोगों को प्रशिक्षण अनुभाग में संलग्न करके समायोजित कर सकता है जिनका प्रशिक्षण मई में शुरू होने वाला था।