फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: बाढ़ के खतरे को देखते हुए हाउसबोट मालिकों ने पुनर्वास की मांग की

विज्ञापन
विज्ञापन
श्रीनगर। कई दिनों की भारी बारिश के बाद झेलम नदी के उफान पर होने के कारण श्रीनगर में हाउसबोट और नाव मालिकों ने पुनर्वास की मांग को फिर से उठाया है। चेतावनी दी कि उनके तैरते घर एक बार फिर संकट के कगार पर हैं। कई नाविकों का कहना है कि इस स्थिति ने 2014 की बाढ़ की याद एक बार फिर से दिला दी। इसमें श्रीनगर का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया था और दर्जनों हाउसबोट नष्ट हो गई थीं।
विज्ञापन

एक हाउसबोट मालिक नज़ीर अहमद ने बताया कि हम हर मानसून में डर के साये में नहीं रह सकते। सरकार ने हमें पुनर्वास का वादा किया था लेकिन अभी तक केवल कागजी कार्रवाई ही पूरी हुई है। उन्होंने कहा कि जब भी बारिश होती है, वे संकट के कगार पर होते हैं और अपने हाउसबोट से पानी निकालने के लिए संघर्ष करते हैं। कश्मीर हाउसबोट ओनर्स एसोसिएशन के मंज़ूर पख्तून ने कहा कि कागजी कार्रवाई और औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और अब बस ज़मीन आवंटन बाकी है। उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों से जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने और कार्रवाई करने का अनुरोध करते हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
झेलम बंड और चिनार बाग के पास रहने वाले हाउसबोट मालिकों ने कहा कि उन्होंने जलस्तर बढ़ते ही अपने-अपने हाउसबोट को सुरक्षित किनारों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था। श्रीनगर के लाल चौक बंड के एक हाउसबोट निवासी इमरान नबी ने कहा कि हम ऐसी स्थिति में हर घंटे रस्सियों को ठीक करते हैं और पानी के स्तर की जांच करते हैं। एक छोटी सी दरार हमें मिनटों में डुबो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2014 की यादें अभी भी ताज़ा हैं और हम फिर से उसी त्रासदी का सामना नहीं करना चाहते। एक हाउसबोट तो उस समय जलस्तर बढ़ जाने से बंड को पार करते हुए आबि गुज़र के रिहाइशी इलाके में घुस गया था।
विज्ञापन

हाउसबोट समुदाय के अन्य सदस्यों ने कहा कि बार-बार आश्वासन के बावजूद उनका पुनर्वास मुद्दा वर्षों से लंबित है। समुदाय के एक सदस्य ने कहा कि हमने सभी दस्तावेज़ पूरे कर लिए हैं। हमने अधिकारियों के साथ कई बैठकें भी कीं लेकिन फाइलों से आगे कुछ नहीं बढ़ा। हम सरकार से अपील करते हैं कि वह अभी कार्रवाई करे इससे पहले कि कोई और बाढ़ हमें तबाह कर दे। यह मांग नई नहीं है। अतीत में बढ़ते प्रदूषण और बार-बार आने वाली बाढ़ के कारण, सरकारों ने झेलम और डल झील से हाउसबोटों को सुरक्षित कॉलोनियों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, देरी और वित्तीय सहायता की कमी के कारण यह विरासत क्षीण होती जा रही है।
कश्मीर घाटी में 750 हाउसबोट
गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में लगभग 750 हाउसबोट हैं जिनमें से कई झेलम और चिनार पार्क में हैं और सभी की हालत खराब है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बाढ़ पीड़ितों के लिए तत्काल राहत की घोषणा की और जम्मू में पुनर्वास के लिए करोड़ों रुपये मंजूर किए वहीं यहां के हाउसबोट मालिकों ने कहा कि ठोस पुनर्वास उपायों के बिना कश्मीर एक सदियों पुरानी परंपरा के खत्म होने का जोखिम उठा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें