श्रीनगर। नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि अलगाववादी नेताओं का मुख्यधारा की पार्टियों में शामिल होने और जम्मू-कश्मीर में चुनाव लड़ने का फैसला अलगाववादी खेमे में वैचारिक बदलाव का संकेत देता है। वह मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के कंगन में पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा, जब भी चुनाव होते थे तो बहिष्कार का हौव्वा खड़ा किया जाता था। आज वे चुनाव लड़ रहे हैं, जो यह दिखाता है कि एक वैचारिक बदलाव आया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अलगाववादियों के चुनाव लड़ने से नेशनल कांफ्रेंस का रुख सही साबित हुआ है कि हिंसा से किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा, हमने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि हम जो भी हासिल कर सकते हैं वह लोकतांत्रिक तरीकों से हासिल किया जाएगा। अगर उन्होंने (अलगाववादियों ने) लोकतंत्र में विश्वास विकसित कर लिया है, तो यह हमारे लिए एक उपलब्धि है, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल में शामिल हों।
यह पूछे जाने पर कि क्या अलगाववादी नेता सैयद सलीम गिलानी का पीडीपी में शामिल होना 2002 के चुनावों में पीडीपी को अलगाववादी समर्थन का सबूत है। इस पर उमर ने कहा, यदि आप दरार पैदा करना चाहते हैं मुझसे इस प्रश्न का उत्तर मांग कर तो मैं इसका जवाब नहीं दे सकता। जम्मू-कश्मीर में भाजपा के चुनाव अभियान की देखरेख के लिए राम माधव की नियुक्ति पर सत्यपाल मलिक के बयान का जिक्र करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि पूर्व राज्यपाल के सत्तारूढ़ दल के साथ बहुत करीबी संबंध थे। उन्हें बेहतर पता होगा, उन्हें भाजपा ने यहां भेजा था और 2019 में जो कुछ भी हुआ, उनकी निगरानी में हुआ।
यह पूछे जाने पर कि क्या माधव को पीडीपी के साथ गठबंधन करने के लिए जम्मू-कश्मीर भेजा गया है। इस पर उमर ने कहा कि केवल भाजपा ही इस पर अधिकार के साथ कुछ कह सकती है। हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं है कि माधव के पीडीपी के साथ सबसे अच्छे संबंध हैं। वह ही थे जो पीडीपी और भाजपा को गठबंधन बनाने के लिए 2014 में एक मंच पर लाए थे। शायद, उन्हें फिर से उसी उद्देश्य से वापस लाया गया है।