17 मई से शुरू होंगे रविवार के मेले
श्रद्धालुओं ने बेहतर सुविधाओं और साफ-सफाई की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। हिंदू धर्म में अधिक मास को मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इसका विशेष धार्मिक महत्व है। पंचांग के अनुसार सौर और चंद्र वर्ष के बीच बनने वाले समय अंतर को संतुलित करने के लिए यह अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मास में दान, व्रत, जप और दीपदान करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
ऐतिहासिक तीर्थ स्थल पुरमंडल और उत्तरवाहिनी में भी अधिक मास को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। यहां 17 मई से शुरू होकर हर रविवार को विशेष मेले आयोजित होंगे। इनमें हजारों श्रद्धालु पहुंचकर गुप्त गंगा में स्नान, भगवान शिव की पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करेंगे।
श्रद्धालुओं का मानना है कि अधिक मास में पुरमंडल और उत्तरवाहिनी में पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। मेले के दौरान दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय स्तर पर भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। धार्मिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इन मेलों से क्षेत्र की धार्मिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों गोविंद राम शर्मा, राज कुमार, अजीत कुमार और साहिल कुमार ने ऐतिहासिक स्थलों पुरमंडल और उत्तरवाहिनी में सुविधाओं की कमी को उजागर किया। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं और साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अमावस्या और अधिक मास पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्नान करने आने वाली महिलाओं के लिए केवल छोटे टेंट और पर्दों की व्यवस्था की जाती है। इससे उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। महिलाओं के लिए स्थायी और सुरक्षित स्नान गृह बनाए जाने की मांग भी उठाई गई।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अधिक मास के दौरान बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, स्नान गृह और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।