कोलकाता की एक फर्म पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप
प्रीत चौधरी
सांबा। सीप की खेती से चर्चा में आया जिले का चिलयारी गांव खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। गांव के दो दोस्तों ने कोलकाता की एक फर्म पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है।
चिलयारी गांव में देसराज और यशपाल ने मिलकर मोती उत्पादन के लिए साल 2023 में सीप की खेती शुरू की। इसके लिए कोलकाता की एक फर्म के साथ करार हुआ। वे फर्म से सीप को कोलकाता से जम्मू तक ट्रेन से लेकर आए और फिर उन्हें चिलयारी में ऑक्सीजन युक्त तालाब में उगाया।
दोनों दोस्तों का आरोप है कि जिस कंपनी ने उन्हें मोती की खेती के लिए सहयोग का भरोसा दिया था। वही धोखाधड़ी कर फरार हो गई। दोनों ने मिलकर 40 लाख रुपये खर्च किए थे। इसके लिए गांव के एक किसान से किराये पर भूमि लेकर तालाब बनाया और उसे 18 हजार रुपये प्रति वर्ष देने का वादा किया। एक व्यक्ति को देखभाल के लिए 5 हजार रुपये महीने के वेतन पर रखा। फर्म ने बताया कि 22 महीने में मोती बनकर तैयार हो जाएंगे। उन्होंने कंपनी के मालिक से संपर्क साधा और मालिक ने आने के लिए कई तिथियां दी लेकिन वह नहीं आया। बाद में उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
दोनों का कहना है कि सीप की खेती से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनकी मेहनत व पूंजी नुकसान हुई लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत नही हारी है। सीप को तालाब से निकाल कर हैदराबाद के एक अन्य व्यापारी के संपर्क में हैं ताकि कुछ ना कुछ ही उन्हें हासिल हो जाए।
उनका कहना है कि यदि सही मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग मिलता तो गांव वास्तव में मोतियों का खजाना बन सकता था। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कंपनी ने उनके साथ धोखाधड़ी की जिससे उनका कारोबार प्रभावित हुआ। इसके अलावा जिले में कुछ अन्य लोगों ने भी सीप की खेती पर सीधा कंपनी के पास रुपये लगाए थे। लोगों के अनुसार तीन साल तक कंपनी का कोई प्रतिनिधि वापस नहीं आया और परियोजना से अपेक्षित परिणाम भी नहीं मिले।
सोशल मीडिया से ली थी सीप की खेती की जानकारी
दोनों दोस्तों ने सोशल मीडिया पर सीप की खेती के बारे में जानकारी जुटाई थी। एक महिला चंडीगढ़ में सीप की खेती के साथ जुड़ी थी। जानकारी जुटाने के बाद वह चंडीगढ़ गए और वहां तालाब देखा व तकनीक की जानकारी ली। इसके बाद कंपनी के साथ उनका करार हुआ। वहीं से उनका सफर शुरू हुआ।
कोट
इस कारोबार के लिए उनके विभाग के साथ कोई बातचीत नहीं हुई थी। लोगों ने सीधे ही कंपनी से बात की। अब तक जम्मू कश्मीर में सीप की खेती के लिए विभाग के पास कोई योजना नहीं है।
- जोगिंदर शर्मा, अधिकारी, मत्स्य पालन विभाग सांबा