सांबा। अदालत ने निर्धारित समय सीमा के बाद चालान पेश करने पर आरोपियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी। मामला वर्ष 2020 में दर्ज हुआ था, जबकि चालान अप्रैल 2025 में पेश किया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सांबा ने इस लापरवाही को गंभीर माना।
अदालत ने कहा कि मामले में चालान पेश करने की निर्धारित समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत संबंधित अवधि को गणना से बाहर करने के बाद भी अभियोजन पक्ष निर्धारित समय के भीतर चालान पेश नहीं कर सका। इसपर अभियोजन पक्ष ने देरी का कारण राजस्व विभाग से सीमांकन रिपोर्ट मिलने में लगा समय बताया। हालांकि, अदालत ने पाया कि रिपोर्ट हासिल करने के लिए काफी समय बाद अनुरोध किया गया था। रिपोर्ट मिलने के बाद भी चालान पेश करने में हुई देरी का पर्याप्त कारण रिकॉर्ड पर नहीं था।
अदालत ने देरी को माफ कर मामले को आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं पाया। आरोपियों की आपत्ति स्वीकार करते हुए अदालत ने मामले से संबंधित कार्यवाही समाप्त कर दी और सभी को सरकारी काम में कथित बाधा, अनधिकृत प्रवेश, गाली-गलौज और समूह में उपद्रव करने के आरोपों से मुक्त कर दिया। साथ ही उनके जमानत बंधपत्र भी समाप्त कर दिए।