सांबा। जिले के सुंब ब्लॉक के लगभग आधा दर्जन पहाड़ी गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए सुंब स्थित स्कूल जाने के लिए हर रोज 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इन गांवों में सड़क संपर्क नहीं है। जिला मुख्यालय से महज 20-25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव विकास से वंचित है। इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
स्थानीय निवासी मेजर सिंह ने कहा, चुनावों के दौरान ही गांव में नेता या अधिकारी आते हैं। उसके बाद कोई लोगों की सुध लेने नहीं आता। यहां तक कि जिला प्रशासन ने भी इन गांवों में कभी जनता दरबार नहीं लगाया। हम आज भी पिछड़ा जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव में आज तक सड़क मार्ग न होने के कारण लोग पहाड़ों से पैदल सफर करने को मजबूर हैं। पढ़ाई करने के लिए बच्चे 10 किलोमीटर पैदल सफर कर स्कूल आने जाने को मजबूर हैं। सरकार से अपील है कि कम से कम सड़क जैसी बुनियादी सुविधा तो हमारे गांवों में उपलब्ध करवाई जाए।
कोट
गांव वालों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए पहाड़ों के जरिये कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है। मानसून के दौरान स्थिति और भी खराब हो जाती है, क्योंकि इन गांवों का अन्य क्षेत्रों से संपर्क टूट जाता है। इसका बच्चों की शिक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सुंब से हंड्ड तक पक्की सड़क और पुल बनाए जाने की मांग लोग करते आ रहे हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
-मंगल सिंह, स्थानीय निवासी
स्कूली बच्चे शिक्षा हासिल करने के लिए पहाड़ी रास्ते से पैदल स्कूल जाते हैं। रास्ते में न कोई पानी की व्यवस्था है। घना जंगल होने के कारण रात को जंगली जानवरों का डर बना रहता है। बच्चों का अधिकांश समय पैदल आने जाने में ही व्यतीत हो जाता है। थकावट होने के कारण बच्चों को घरों में पढ़ने का समय ही नहीं मिलता। लोग वर्षों से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके गांव में भी कभी गाड़ी देखने को मिले। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद हमारे गांवों को सड़क संपर्क प्रदान करने लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
-मोहिंदर सिंह, स्थानीय निवासी
कोट
समोठा में पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क निर्माण के लिए नाबार्ड के तहत योजना बनाकर मंजूरी के लिए भेजी गई थी। अगले वित्तीय वर्ष तक योजना को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद इन गांवों को सड़क सुविधा प्रदान करने के लिए काम शुरू होगा।
-दरबारी लाल, असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, लोक निर्माण विभाग
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