विजयपुर। डुग्गर मंच की तरह से गुड़ा सलाथिया में कवि चरण सिंह और पद्मश्री पद्मा सचदेव का जन्मदिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नागेंद्र सिंह जम्बाल (जेकेएएस) ने की। डुग्गर मंच के प्रधान पद्मश्री मोहन सिंह ने कवि चरण सिंह और पद्मश्री पद्मा सचदेव के डोगरी साहित्य में विशेष योगदान पर संक्षेप में चर्चा की।
उन्होंने कवि चरण सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन्होंने थोड़े ही समय में डोगरी शायरी में अपनी एक खास पहचान बना ली। 28 वर्ष की उम्र में 22 जून 1969 की मध्यरात्रि को बिजली का करंट लगने से उनकी मौत हो गई। तब तक उनकी जोत नाम की डोगरी कविताओं की किताब छप चुकी थी। इसके साथ ही वे कुछ किताबों का सम्पादन भी कर चुके थे। उसके बाद उन्होंने कवियत्री पद्मश्री पद्मा सचदेव की साहित्य यात्रा पर भी थोड़ा प्रकाश डाला। उन्हें उनके कविता संग्रह मेरी कविता मेरे गीत पर 1971 वर्ष का साहित्य अकादेमी पुरस्कार भी मिल चुका है। बिरला फाउंडेशन की तरफ से सरस्वती सम्मान भी इन्ही के नाम है। इन्हें साहित्य अकादेमी फेलो सम्मान के साथ भी सम्मानित किया गया है। इनकी लगभग 10 हिंदी और 10 ही डोगरी में किताबें छप चुकी हैं।
लता मंगेशकर से इन्होंने डोगरी के कई गीत गवाएं हैं। सरकार की तरफ से इनके नाम पर एक महिला कॉलेज का नाम पद्मश्री पद्मा सचदेव महिला कॉलेज गांधी नगर रखा गया है। इस कार्यक्रम में मां बोली डोगरी की सेवा में लगे कुछ साधकों को सम्मानित भी किया गया। इसमें प्रख्यात डोगरी साहित्यकार ओम गोस्वामी और जम्मू विश्वविद्यालय में कार्यरत डोगरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. पदम देव सिंह को कवि चरण सिंह सम्मान और कवयित्री कृष्णा प्रेम तथा डॉ. सुरिता शर्मा को पद्मश्री पद्मा सचदेव सम्मान से सुशोभित किया गया।
इस कार्यक्रम में पद्मश्री मोहन सिंह द्वारा लिखे गए और निर्देशित किये गए नाटक ''''मोहरे'''' का भी मंचन किया गया तथा कार्यक्रम के अंत में एक कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इसमें दर्शन दर्शी, शिवदेव सिंह सुशील, विजय वर्मा, रणधीर सिंह रायपुरिया,पूर्ण चन्द्र शर्मा, बिशन सिंह दर्दी, सुषमा रानी, सरिता खजूरिया, राकेश वर्मा, अजय सिंह, दिलीप सिंह आदि कवियों ने अपनी अपनी रचनाएं पढ़कर कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए।