एफपीओ की सफलता की कहानी सीओ की जुबानी, किसानों को कारोबार करना भी सिखाया
मीरां साहिब। किसानों का समूह यानी एफपीओ से किसानों की तकदीर बदल रही है। तरक्की की कहानियां लिखी जा रही हैं। किसानों की सौदेबाजी की शक्ति बढ़ी है। उत्पादन लागत कम हुई है, कृषि उपजा का बेहतर मूल्य मिल रहा है। इससे किसानों की सीधे बाजार तक पहुंच हुई है। उन्नत तकनीक और ऋण तक पहुंच आसान हुई है। उनकी आय में वृद्धि हुई है। किसान मेले के अंतिम दिन एफपीओ के महत्व पर चर्चा का यह निष्कर्ष रहा।
शेर-ए कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी स्काॅस्ट चट्ठा जम्मू में तीन दिवसीय मेला शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस दौरान मौजूद एफपीओ के सीओ से बातचीत में उन्होंने सफलता की कहानी सुनाई।
फूलों के कारोबार से बढ़ी किसानों की आय
कोट भलवाल गोल्डन हार्वेस्ट फार्मर्स प्रोड्यूसर्स को ऑपरेटिव लिमिटेड के सीईओ नोशाद अली गुटों के फूलों की कई वैरायटी का कारोबार कर रहे जिसमें मैरी गोल्ड में भूसा नारंगी, अफ्रीका मेरीगोल्ड, पूसा बसंती संतरी रंग आदि शामिल है। उन्होंने कहा कि छोटे फार्मर फूल खरीद इसे बनाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार मंदी होने पर वह फूलों को स्टोर कर लेते। छोटे किसानों के पास उसका साधन नहीं आने पर दिक्कत आती है। कई बार मांग होने पर बाहरी राज्यों में भी फूल बेचने के लिए बेचे जाते हैं। अभी तक लगभग पचास किसानों को जोड़ा गया। जिस तरह से फूलों का कारोबार आरंभ किया है उसमें काफी आय का साधन होने पर फूलों की खेतीबाड़ी से किसानों का लाभ मिल रहा है।
काले जीरे की खेती के तरीके को बदला
डोडा दा देशा मल्टीपर्पज कार्प लिमिटेड के सीईओ हितेशवर ठाकुर का कहना है कि 300 किसानों को साथ जोड़ कर काले जीरे की खेती कर रहे हैं। उनका गांव देशा नाम ही ओर उसी के नाम पर संस्था बना कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि एक कनाल जमीन से दो किलो तक काला जीरा पैदा किया जाता है। बुवाई के लिए 1 से 25 नवंबर का समय सबसे उत्तम है। इसे छिटकवा विधि या कतारों (कल्टीवेटर) में बोया जा सकता है। प्रति एकड़ लगभग 4-5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। बुवाई के समय गोबर की खाद या कंपोस्ट का उपयोग करना अच्छा रहता है। सिंचाई बुवाई के 25-30 दिन बाद और फिर आवश्यकतानुसार 15-20 दिनों के अंतराल पर करें। फसल को खरपतवार मुक्त रखना महत्वपूर्ण है। पानी का प्रबंध न होने पर किसानों को बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है। पिछले तीन वर्ष से इसका कारोबार कर रहे। वह ऑनलाइन कारोबार करने के साथ व्यापारी वर्ग को भी मांग के मुताबिक काला जीरा बेचते हैं। ठाकुर ने कहा कि इसकी अच्छी गुणवत्ता के कारण, यह एक नकदी फसल है जो किसानों को 1500 से 1900 रुपये प्रति किलो तक का बाजार मूल्य प्रदान करती है।
165 किसानों का समूह बनाया बिश्नाह बासमती फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन के सीईओ चंद्रभूषण का कहना है कि क्षेत्र में बासमती की खरीदारी करते। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 165 किसानों का समूह बनाया होने पर धान की खरीददारी कर रहे है। पिछले वर्ष 38 लाख रुपये की धान की खरीदारी की। पहले किसानों की धान व्यापारी खेत में आ कर खरीद लेते थे। अब किसानों को फसल की गुणवता के मुताबिक कीमत देने पर किसानों को भी लाभ मिल रहा है। फसल बेचने पर किसानों को भुगतान किया जाता है।
जेके एग्री एंड अलाईड प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन के सीईओ का कहना है कि वह गांव स्लैड में डेयरी चला रहे हैं। किसानों से दूध खरीद इसे बेच रहे हैं। कि किसानों को दूध की बेहतर कीमत मिलने पर उनके दूध की बेहतर गुणवत्ता का हो इसके लिए पशुपालकों को जागरूक करने पर उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकती है।
दूसरे राज्यों को भी बेच रहे बासमती
कठुआ महरीन फीड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड चक प्रोटीन चक्रा की सीईओ अरूषी वर्मा ने कहा कि देश में खेती करने का तरीका बदल रहे हैं। खेती के पुराने ज्ञान को मॉडर्न बिज़नेस तरीकों के साथ करने पर किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है। वह 370 वैरायटी की बासमती की खेती करने पर उसे जम्मू कश्मीर सहित दूसरे राज्यों में बेचने का कार्य कर रहे हैं। 250 किसानों का एक समूह का गठन करने पर उनके द्वारा पैदा की गई धान का चावल बेच रहे हैं।