जम्मू-अखनूर। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत वीरवार को आत्मरक्षा कार्यशाला का आयोजन अखनूर डिग्री कालेज में किया गया। इंडिया ताइक्योन फेडरेशन के महासचिव संजय सचदेवा व परवीन कुमार ने पहले आत्मरक्षा की तकनीक का महत्व छात्राओं को बताया। उन्होंने कहा कि इसे सीखने से सबसे बड़ा फायदा होता है कि हम संकट के वक्त समझदारी से काम लें, घबराए नहीं।
प्रशिक्षक ने छात्राओं को मुसीबत के वक्त घिर जाने पर किस तरह से तकनीक का इस्तेमाल करें, इसे प्रैक्टिकल कर भी दिखाया। मिशन शक्ति और इंडिया ताइक्योन फेडरेशन के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में दो बैच में करीब 100 छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर वीमेन स्टडीज सेंटर की संयोजक डॉ. अंजु बाला ने कहा कि वर्तमान समय में आत्मरक्षा का ज्ञान केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है। डॉ. संध्या रानी, डॉ. दीपाली महाजन, प्रोफेसर नीलम थापा, डॉ. दीप कुमार, डॉ. अमित कुमार, प्रोफेसर जया माला ठाकुर, प्रोफेसर नेहा उत्तम और सोनिया शर्मा व नेहा उत्तम भी इस कार्यशाला में मौजूद रहे।
इन बातों का रखना होगा ध्यान
-संकट की स्थिति में घबराने के बजाय साहस और समझदारी से काम लेना चाहिए।
-हर बार भागना ही विकल्प नहीं होता, बल्कि सही तकनीक और मानसिक तैयारी से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
-हाथ छुड़ाने, हमले को रोकने, संतुलन बनाए रखने और शरीर की ताकत का सही उपयोग करने जैसी तकनीकों का नियमित अभ्यास करना होगा।
- अपने आसपास के माहौल पर ध्यान दें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध लगे, तो तुरंत वहां से हट जाएं। हेडफोन लगाकर या फोन में खोकर न चलें।
- सिर ऊंचा, पीठ सीधी और कंधे पीछे करके चलें। इससे आप एक आसान निशाना नहीं लगते।
- हमलावर के कमजोर अंगों पर वार करें
- चाबी, छाता, बैग या पेन जैसे सामान को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
अपराजिता के तहत आत्मरक्षा के गुर सीखतीं छात्राएं। स्रोत संवाद