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सैन्य कमांडो की तरह आतंकियों पर टूट पड़ी थी जांबाज युवकों की टोली

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रियासी। माहौर तहसील के दूरदराज टुकसन ढोक गांव में लश्कर कमांडर तालिब हुसैन शाह समेत दो आतंकियों को पकड़ने वाले जांबाज युवकों की टोली ने इस ऑपरेशन को पेशेवर कमांडो की तरह अंजाम दिया। इन युवकों ने बताया कि पुलिस और सेना के कई जागरूकता कार्यक्रम में उन्हें बताया गया था कि आतंकियों से सामना होने पर क्या करना है। वो सब बातें जेहन में थीं। इसलिए डर नहीं लगा। रणनीति बनाई और पूरा प्लान कदम दर कदम आगे बढ़ाकर अंजाम तक पहुंचाया।
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मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि शनिवार जब वह काम से लौटकर टुकसन गांव में स्थित अपनी ढोक में पहुंचा तो वहां दो संदिग्ध आ धमके थे। उन्होंने कहा कि वे कारोबारी हैं, लेकिन उन्होंने फोन स्विच ऑफ कर जमीन पर रखने को कहा। वह समझ गया कि ये आतंकी हैं। अंधेरे में उसने शौच का बहाना बनाकर मोबाइल साथ लिया और बाहर जाकर अपने भाई नजीर अहमद को फोन पर इत्तला दे दी। उन्हें कहा कि मुमकिन है यह मेरी आखिरी कॉल हो। नजीर ने अन्य रिश्तेदारों रोशन दीन, शमसुद्दीन, मुश्ताक अहमद और मोहम्मद इकबाल को अपने स्तर पर आतंकियों से मुकाबले के लिए तैयार कर लिया। घना जंगल और सड़क संपर्क से दो घंटे पैदल रास्ता होने की वजह से सुरक्षा बलों को पहुंचने में खासा वक्त लगना था। लिहाजा सभी खुद टुकसन ढोक पहुंच गए। आतंकी उस समय भीतर सो रहे थे। हमने सुबह होने का इंतजार किया और उनके हथियारों से भरे बैग अलग कर उन पर टूट पड़े।
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चार ने भीतर दो ने बाहर संभाला मोर्चा
इकबाल ने कहा कि रणनीति के तहत हम चार लोग भीतर गए थे जबकि दो लोग बाहर खड़े हो गए ताकि कोई भागने न पाए। सबसे पहले हथियारों को अलग कर आतंकियों को निहत्था कर दिया, फिर दोनों को काबू कर लिया।
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काबू में नहीं आ रहा था लश्कर
कमांडर, जमकर लगाए थप्पड़
युवकों ने बताया कि आतंकियों के साथ एक घंटे तक गुत्थमगुत्था चलती रही। लश्कर कमांडर तालिब चंगुल से छूटकर बाहर तक आ गया था। हमने उसे ऐसा दर्शाया कि बाहर सेना ने घेर रखा है। इससे वह रुक गया। तालिब को काबू करने के लिए मुश्ताक ने उसे कई थप्पड़ दे मारे। इसके बाद आतंकी को पूरी तरह से काबू कर रस्सी से बांध दिया।
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किसी हाल में पनपने नहीं दे सकते आतंकवाद
- देश का दुश्मन हमारा दुश्मन, वर्दी पहनकर करना चाहते हैं देश सेवा
युवकों ने कहा कि अब आतंकवाद को किसी भी सूरत में फिर पनपने नहीं देंगे। माहौर तहसील कभी आतंकवाद का गढ़ थी। एलओसी से सटे राजोरी जिले से आतंकी माहौर रूट से कश्मीर घाटी आवाजाही करते थे। जो देश के दुश्मन हैं वो हमारे दुश्मन हैं। हम सेना और पुलिस के साथ खड़े हैं। इन युवकों ने कहा कि वे वर्दी पहनकर देश सेवा करना चाहते हैं। सेना और पुलिस हमेशा हमारे साथ रही है और हम उनके साथ। उल्लेखनीय है कि युवकों को बहादुरी के लिए उप राज्यपाल ने पांच लाख रुपये और पुलिस महानिदेशक ने दो लाख रुपये के नकद पुरस्कार का एलान किया है। सोमवार को पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने खुद माहौर पहुंचकर युवाओं की बहादुरी की सराहना करते हुए सेना और पुलिस की भर्ती में प्राथमिकता दिलाने का आश्वासन दिया था।
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