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एनआईए का दावा : कश्मीर को झुलसाने के लिए गिलानी के दामाद को पारा ने दिए थे पांच करोड़

Sat, 27 Mar 2021 09:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू / नई दिल्ली

सार

  • जांच एजेंसी की चार्जशीट में हुआ खुलासा
  • पारा अपने वकील के माध्यम से, इन आरोपों से इनकार कर रहा है
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NIA (सांकेतिक तस्वीर)
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विस्तार
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया है कि वर्ष 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के पोस्टर ब्वाय बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर घाटी को अशांत रखने के लिए पीडीपी नेता वहीद उर रहमान पारा ने कट्टरपंथी हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह, उर्फ अल्ताफ फंटूश को पांच करोड़ रुपये दिए थे। पारा को जनवरी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-ताइबा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों  के साथ संपर्क रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हाल ही में जम्मू में एक विशेष अदालत में दायर एक चार्जशीट में ये खुलासा किया था। एनआईए ने आरोप लगाया कि जुलाई 2016 में सेना के साथ मुठभेड़ में मारे गए वानी की मौत के बाद, पारा अल्ताफ अहमद शाह के संपर्क में था, और उसे यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि था कि कश्मीर घाटी पूरी तरह अशांत रखनी है, वहां पथराव और हिंसात्मक घटनाएं व्यापक पैमाने पर होनी चाहिए। 

पारा, अपने वकील के माध्यम से, इन आरोपों से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उसे राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अदालत ने पूरक चार्जशीट में नाम न होने पर उसे जमानत दे दी थी। इसके बाद कश्मीर में काउंटर इंटेलिजेंस विंग द्वारा उसे पुन: गिरफ्तार किया गया था, और तब से जेल में है। श्रीनगर में एनआईए अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी।
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पीडीपी ने पहले दावा किया था कि केंद्र सरकार पारा पर एक रणनीति के तहत दबाव बना रही थी कि वह पाला बदल कर भाजपा में शामिल हो जाए। एनआईए की चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि पारा ने शाह को 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जिसे गिलानी का करीबी सहयोगी भी माना जाता था। पारा ने यह राशि पीडीपी की ओर से हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को दी थी। इस दौरान, शाह पार्टी के युवा नेता पारा के साथ घनिष्ठ संपर्क में था। पारा को पीडीपी प्रमुख और तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का करीबी विश्वासपात्र माना जाता है। 
 

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बुरहान की मौत के बाद हिंसा की आग में झुलसी थी कश्मीर घाटी

कश्मीर में वर्ष 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद लगभग 53 दिनों के लिए कर्फ्यू लगा रहा था। इस दौरान हिंसक झड़पों में लगभग 100 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और 4,000 सुरक्षाकर्मियों सहित हजारों लोग घायल हुए। जम्मू और कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादी समूहों को धन मुहैया कराने के रैकेट में शामिल होने के आरोप में जुलाई 2017 में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद शाह पहले ही न्यायिक हिरासत में हैं।
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