पाकिस्तान ने डायरेक्ट जनरल मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) स्तर की बातचीत में भले ही भारत को भरोसा दिलाया हो कि वह संघर्षविराम समझौते का पालन करेगा परंतु उसका इतिहास इसकी पुष्टि नहीं करता।
पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर से लगती नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगातार संघर्षविराम का उल्लंघन करता रहा है। इस वर्ष बीते 56 दिनों में उसने 591 बार समझौते का उल्लंघन करते हुए गोलाबारी की है। सीमापार से होने वाली इस गोलाबारी के कारण इस इलाके में रहने वाले लोग हमेशा डर में जीते हैं।
घाटी में तैनात सेना के एक आला अधिकारी ने बताया कि यहां पाक प्रायोजित आतंकवाद की करीब तीन दशक पहले हुई शुरुआत के साथ ही पाकिस्तान ने एलओसी के उस पार से आतंकवादियों को घाटी में धकेलना शुरू कर दिया था।
पिछले कुछ वर्षों में एलओसी पर भारतीय सेना के काउंटर इंफिल्ट्रेशन ग्रिड के मजबूत होने के बाद से घुसपैठ में कमी के चलते पाकिस्तान ने रणनीति में बदलाव किया और आतंकियों की घुसपैठ को कामयाब बनाने के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा कवर फायरिंग का सहारा लिया गया।
इसके चलते जब भी कभी आतंकियों को घुसपैठ करानी होती है तो पाकिस्तानी सेना गोलाबारी का सहारा लेती है। जनवरी में 336 और इस महीने 25 फरवरी तक 255 बार गोलाबारी की गई।