नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले खुद भी नशे के मकड़जाल में फंस रहे हैं। प्रदेश की जेलों में बंद दो हजार से ज्यादा कैदी नशे की लत से पीड़ित हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इन कैदियों का दो माह तक इलाज चलता है, जिन पर हर माह 15 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
कारावास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह मामले नशा तस्करों के हैं। यह लोग नशीले पदार्थ बेचते-बेचते खुद नशे की लत में पड़ गए। पकड़े जाने पर जब इन्हें जेल में लाया जाता है तो नशे की डोज न मिलने पर इनकी तबीयत बिगड़ने लगती है। स्वास्थ्य ज्यादा खराब होने पर कैदियों को अस्पताल ले जाना पड़ता है। चिकित्सकीय जांच में ज्यादातर मामले तनाव, अनिद्रा समेत कई बीमारियों से संबंधित मिले हैं।
प्रदेश की अलग-अलग जेलों में बंद कैदियों को हैपेटाइटिस-सी, लीवर में इनफेक्शन, किडनी खराब होने के रोग जकड़ रहे हैं। इनका इलाज भी सरकारी पैसे से ही करवाया जा रहा है। जेल प्रशासन के मुताबिक पहले हत्या और चोरी के मामलों में कैदी ज्यादा आते थे, लेकिन अब नशा तस्करी में शामिल अधिक कैदी जेलों में बंद हैं, जो कई प्रकार के नशे का सेवन करते हैं।
दो साल में जम्मू की जेलों में बंद नशा तस्करी के चार कैदियों ने तोड़ा दम
बीते दो साल में नशा तस्करी में जम्मू की जेलों में बंद चार कैदियों की मौत हुई है। इनमें अंबफला की जेल में बंद बख्शी नगर के एक कैदी ने दम तोड़ा था। बताया जा रहा है कि नशा न मिलने से मौत हुई थी। तबीयत बिगड़ने पर इन्हें सुपर स्पेशियलिटी और जीएमसी पहुंचाया गया, लेकिन इसकी मौत हो गई। इसके अलावा भलवाल सेंट्रल जेल और अन्य जेलों से भी तीन कैदियों की मौत हुई है। ये सभी नशा तस्करी के मामले में सजा काट रहे थे।
एनडीपीएस के तहत सजा काट रहे कैदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें अधिकतर कैदी नशे की लत में पड़े होते हैं। जेल प्रशासन की ओर से इनका इलाज करवाया जा रहा है।
- सलीम अहमद बेग, अधीक्षक, जम्मू जेल