जम्मू। प्रदेश कांग्रेस नई कार्यकारिणी का अब तक गठन नहीं कर पा रही, जबकि नए अध्यक्ष को बने हुए छह महीने हो चुके हैं। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद पार्टी के संगठन का विस्तार नहीं हुआ। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कहते हैं कि वे पार्टी से जुड़े हर वर्ग की नब्ज टटोलने के बाद ही विस्तार करेंगे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पार्टी अपनी हार के आगामी निकाय चुनाव में दोहराव से बचने के लिए वक्त लगा रही है, ताकि कोई भी फैसला उनको नुकसान न पहुंचाए।
जानकारी के अनुसार 16 अगस्त 2024 को हामिद कर्रा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए थे, लेकिन अभी तक पार्टी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कर्रा का कहना है कि पूरे संगठन में बदलाव होगा। लेकिन इसके पहले हम पार्टी के साथ जुड़े हुए हर वर्ग से बात करेंगे। अभी बातचीत का सिलसिला चल रहा है। हमने पंचायत स्तर से लेकर प्रदेश स्तर के नेताओं से अलग अलग बात की है। सबकी अपनी अपनी राय है। हर किसी ने अपने सुझाव दिए हैं। इन सबको ध्यान में रखकर ही विस्तार करेंगे।
भाजपा के अपने पैरामीटर, इससे हमें कोई मतलब नहीं
हामिद कर्रा से ये पूछने पर कि भाजपा अपने संगठन का तेजी से विस्तार रही है। मंडल अध्यक्ष तक बदले जा रहे हैं। बूथ स्तर पर पहुंच के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, कांग्रेस पीछे क्यों रह गई। इस पर कहा कि भाजपा के अपने पैरामीटर हैं और हमारे अलग। हमारा रुख स्पष्ट है कि हम विस्तार करने में जल्दबाजी नहीं करेंगे। भाजपा क्या करती है, इससे हमें कोई मतलब नहीं है। हमारा अपना एजेंडा है। जिस पर खरा उतरने के बाद ही बदलाव होगा।
कांग्रेस के जहन में पिछली हार
नेशनल कांफ्रेंस के साथ कांग्रेस को गठबंधन करने का कोई खास लाभ विधानसभा चुनाव में नहीं मिला। इससे पार्टी को खासतौर पर जम्मू संभाग में बड़ी हार मिली। इसके विपरीत भाजपा ने जमकर लाभ उठाया। भाजपा ने कांग्रेस को डोगरा सीएम जैसे मुद्दों पर घेरा और सफल भी हुए। अब जबकि निकाय चुनाव होने हैं। नेकां और कांग्रेस दोनों ही अलग अलग लड़ने की बात कर रहे हैं। जाहिर है कि कांग्रेस के जहन में पिछली हार है। वे पिछली हार को दोहराना नहीं चाहते। इसलिए संगठन के विस्तार में जल्दबाजी नहीं कर रहे। वे भाजपा के संगठन विस्तार की तरफ भी देख रहे हैं। ये भी विस्तार में देरी का कारण हो सकता है।
-कंवल सिंह, राजनीतिक विश्लेषक