भाजपा मुख्यालय में सोमवार को पार्टी प्रवक्ता गिरधारी लाल रैना पत्रकार वार्ता करते हुए।
जम्म। जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता गिरधारी लाल रैना ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए महाराजा हरि सिंह के नाम का इस्तेमाल किया है, जबकि नेकां और उसके संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य के महान शासक के साथ अपमानजनक व्यवहार किया था। नेकां अपने स्वार्थ के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलने के साथ लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करती रही है।
पार्टी मुख्यालय में सोमवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए रैना ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को इतिहास के बारे में अच्छी तरह याद है कि महाराजा हरि सिंह को उनके प्रिय राज्य से किसने बेदखल किया और उन्हें उनके जन्म स्थान पर अंतिम संस्कार करने से भी वंचित रखा गया।
इतिहास में नेशनल कॉन्फ्रेंस और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला सहित इसके नेताओं द्वारा महाराजा बहादुर के व्यक्तित्व को बदनाम करने में निभाई गई खलनायकी की भूमिका को विस्तार से दर्ज किया गया है। अक्तूबर 1947 में महाराजा साहिब द्वारा विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद नेकां-कांग्रेस गठबंधन द्वारा उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया गया था। यहां तक कि इन दोनों दलों द्वारा विलय में देरी भी की गई थी, जैसा कि संसदीय पुस्तकालय में 24 जुलाई 1952 को लोकसभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा दिए गए बयान में दर्ज है।
यह भी सार्वजनिक डोमेन में है कि 1947 में महाराजा (अंतिम डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह) द्वारा छोड़े गए नक्शे और अन्य सामग्री को किसने नष्ट कर दिया। नेकां को बताना चाहिए कि उसने डोगरा राजवंश के झंडे को क्यों बदल दिया और इसके बजाय अपनी पार्टी के झंडे (नेकां ध्वज) को जम्मू और कश्मीर का झंडा क्यों बनाया। उसे यह बताना चाहिए कि विजयी भारतीय सेना को आक्रमणकारियों को हटाने से किसने रोका।
नेकां के प्रवक्ता और उनके नेता आज तक महाराजा को बदनाम करते आ रहे हैं। नेकां की नीतियां वास्तव में राज्य में सांप्रदायिक और क्षेत्रीय विभाजन और अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार थीं, जिसके कारण अंततः राज्य को तोड़ना पड़ा और इसे केंद्र शासित प्रदेश में बदलना पड़ा।