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Jammu News: हर 10 साल में 33 करोड़ लीटर बढ़ रही पानी की डिमांड, 25 लाख की प्यास बुझाना चुनौती

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में हर दस साल में पानी की डिमांड 33 करोड़ लीटर तक बढ़ रही है। इससे 25 लाख लोगों को जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल पा रहा। 2001 की जनगणना के मुताबिक, प्रदेश की आबादी एक करोड़ के आसपास थी। इस दौरान पानी की डिमांड 1.35 करोड़ लीटर रही, जबकि उपलब्धता 1.10 करोड़ लीटर के आसपास थी। 2011 में एक करोड़ 25 लाख लोगों के लिए 1.68 करोड़ लीटर पानी चाहिए था, जबकि उपलब्धता 1.40 करोड़ लीटर थी।
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मौजूदा समय में प्रदेश में एक करोड़ 52 लाख के करीब आबादी का अनुमान है। ऐसे में पानी 2.05 करोड़ लीटर चाहिए, लेकिन आपूर्ति 1.80 करोड़ लीटर हो रही है। पानी की आपूर्ति कम होने से कम से कम 25 लाख लोगों को जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल पा रहा। ग्रामीण इलाकों में तीन से चार दिन बाद, तो शहरों के भी कुछेक इलाकों में दूसरे दिन पानी की आपूर्ति हो रही है। प्रदेश में नदियां व भूजल ही पेजयल आपूर्ति का स्रोत हैं। 1947 में करीब 6042 क्यूबिक मीटर पानी था। अब 1667 क्यूबिक मीटर नीचे गिर गया है। इससे ट्यूबवेल के माध्यम से भी पर्याप्त पानी लोगों को नहीं मिल पा रहा। शहरों की बात करें तो हर रोज प्रति व्यक्ति 135 की जगह 120 लीटर पानी ही मिल पा रहा है। ग्रामीण इलाकों में 155 की जगह 130 लीटर पानी मिल है।

इसलिए बढ़ रही पानी की डिमांड
प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों का लगातार विकास हो रहा है। यहां पर नई काॅलोनियों बसाई जा रही हैं। शहरों में रोजगारों की तलाश में ग्रामीण और अन्य राज्यों से लोग आ रहे हैं। इस कारण भी पानी की डिमांड निर्धारित मांग से ज्यादा बढ़ रही है।
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जल जीवन मिशन, अमृत-2 चरण से बढ़ेगा पानी
चुनौती से निपटने के लिए जल जीवन मिशन और अमृत-2 चरण में पानी के स्रोत बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार नए स्रोत विकसित करने के लिए डीपीआर तैयार कर रही है। इसके बाद प्रति व्यक्ति को निर्धारित मापदंडों के हिसाब से पानी मिलना है। जल जीवन मिशन का इस साल के अंत तक काम पूरा होने की संभावना है। शहरी इलाकों में काम अभी शुरू होना है।
योजनाओं का यह हाल
आजादी के बाद से वर्ष 2019 तक सरकारी बजट से ही जल आपूर्ति के लिए जरूरी सुविधाओं के विकास पर काम हुआ। लेकिन बढ़ती जनसंख्या और जरूरतों के अनुपात में यह काम नहीं हो पाया। ग्रामीण इलाकों में 15 अगस्त 2019 के बाद जलजीवन मिशन की घोषणा हुई। 2020 में परियोजना पर काम शुरू हुआ। काम 2022 में पूरा हो जाना था लेकिन नहीं हुआ। इसकी मियाद बढ़ाकर 2024 की गई, फिर भी काम पूरा नहीं होने पर अब इसे 2026 तक बढ़ाया गया है। शहरी इलाकों की बात करें तो 2024 में अमृत-2.0 योजना में काम के लिए डीपीआर तैयार हुई है।


प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी उपलब्ध करवाने पर काम तेजी से किया जा रहा है। जल जीवन मिशन और अमृत-2 से नए प्रोजेक्टों पर काम किया जाएगा। जलसंकट से प्रदेश बाहर आएगा।
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- विकास शर्मा, मुख्य अभियंता, जलशक्ति विभाग
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