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मानवाधिकार आयोग का पुनर्गठन करें, ये तो आपके हाथ में है: पर्रा

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जम्मू। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक वहीद पर्रा ने प्रदेश में मानवाधिकार आयोग के पुनर्गठन की मांग की। बजट पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, बेशक सरकार के अधीन गृह विभाग नहीं है, लेकिन आयोग तो बना सकती है। खासकर कठुआ जिले में हाल ही में हुई हत्याओं के मद्देनजर। पर्रा ने कानून और व्यवस्था को लेकर सरकार के रवैये की आलोचना की और जवाबदेही की मांग की।
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पर्रा ने कहा, चाहे कठुआ हो या सोपोर की हत्याएं...हम खुद को दोषमुक्त नहीं कर सकते। कानून और व्यवस्था आपके हाथ में नहीं है। जब आप लोगों से वोट मांगते हैं, तो उन्हें यह नहीं बताते कि आप वास्तव में किस पर नियंत्रण रखते हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र में सत्य और सुलह आयोग स्थापित करने के वादे का जिक्र करते हुए पर्रा ने पूछा कि बजट में इसका कोई उल्लेख क्यों नहीं है। अगर यह आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, तो कम से कम यह सदन जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकार आयोग को फिर से स्थापित कर सकता है। अगर कानून-व्यवस्था पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है, तो कम से कम कठुआ और सोपोर में मानवाधिकार उल्लंघन पर रिपोर्ट मांगने की सुविधा तो मिल ही सकती है, ताकि इस सदन को जानकारी मिल सके।

65 फीसदी युवा...फिर भी बजट में उनके लिए कुछ नहीं
पर्रा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक युवा केंद्र शासित प्रदेश है। इसकी 65 प्रतिशत आबादी युवा है। फिर भी बजट में उनको नजरअंदाज कर दिया गया। रोजगार गारंटी का कोई उल्लेख नहीं है। छह लाख लोगों ने सिर्फ़ 15,000 पुलिस पदों के लिए आवेदन किया। फिर भी सरकार ने उनके संघर्षों को नजरअंदाज किया। रोजगार नहीं दे सकते, तो कम से कम स्टार्टअप का समर्थन करें। आप मिशन यूथ के तहत सर्वेक्षण कर रहे हैं, लेकिन रोजगार कहां है।
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