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Jammu News: स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पर असमंजस

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जम्मू। विधानसभा के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के पद पर असमंजस बना हुआ है। अभी तक डिप्टी स्पीकर के पद के लिए विपक्ष में भाजपा को सूचित नहीं किया गया है। इस विधानसभा चुनाव में नेकां के बाद भाजपा दूसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। जिसमें सामान्य तौर पर सत्तापक्ष से स्पीकर और विपक्ष से डिप्टी स्पीकर पर सहमति बनती रही है, लेकिन ऐसा न होने की सूरत में शुरू से ही दोनों की टकराव के साथ शुरुआत हो सकती है। इससे उमर सरकार को भी अपने एजेंडों को जमीन पर उतारने में कई चुनौतियां रहेंगी, जिसका विपक्ष जोरदार विरोध करेगा।
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पिछली भाजपा और पीडीपी गठबंधन सरकार की बात करें तो विपक्ष में नेकां से नजीर गुरेजी को विधानसभा में डिप्टी स्पीकर की जिम्मेदारी दी गई थी। यह ऐसा इसलिए भी किया जाता है कि विस के एजेंडों को चलाने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष में संतुलन बना रहे। इस बार के विधानसभा चुनाव में नेकां ने पूर्ण बहुमत से 42 सीटें हासिल की हैं, जबकि भाजपा ने 29, लेकिन नगरोटा से विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद भाजपा की एक सीट कम हो गई है। सामान्य तौर पर दोनों दलों के बीच स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद को लेकर सहमति बनती है। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर चुनाव से दोनों पदों को चुनने का प्रावधान होता है। इसमें भाजपा भी स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकती है, जिसमें अधिक विधायक वाले वोटों से दोनों पद चुने जाते हैं। अगर ऐसा हुआ तो उमर सरकार के लिए भी विधानसभा सत्र और सरकार चलाना आसान नहीं होगा, क्योंकि सरकार जो भी एजेंडा विस में लाएगी, उसका लगभग भाजपा विरोध करेगी। किसी भी एजेंडे को पास करने के लिए विपक्ष की सहमति भी रहती है।
मौजूदा प्रोटेम स्पीकर मुबारक गुल स्पीकर का चुनाव करवाएंगे, लेकिन नेकां की ओर से नाम प्रस्तावित करने पर सर्वसम्मति से उसे चुन लिया जाएगा। जिसके बाद डिप्टी स्पीकर को चुनने का काम किया जाता है। एक पहलू यह भी होता है कि अगर विपक्ष के पास 10 प्रतिशत से कम सीटें हैं तो बहुमत वाले सत्तापक्ष को अपना स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुनने का अधिक अधिकार रहता है, क्योंकि चुनाव की सूरत में सीटों के मामले में कमजोर विपक्ष इसमें विधायकों का समर्थन हासिल नहीं कर पाता, लेकिन भाजपा के 28 और अन्य निर्दलीय विधायकों के समर्थन से पलड़ा पलट सकता है।
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भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र रैना का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से उन्हें डिप्टी स्पीकर के लिए सूचित नहीं किया गया है। हम सरकार की आगे की कार्रवाई पर नजर रखे हुए हैं। ऐसा भी बताया जा रहा है कि दिवाली के बाद स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के लिए दोनों दलों के बीच बात हो सकती है।
वहीं, नेकां के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने जिस तरह से उमर सरकार को विधानसभा चुनाव से पहले के अपने वादों और प्राथमिकताओं को याद करने के लिए पत्र लिखा है, उससे नेकां के भीतर पर सब कुछ ठीक चल रहा है, ऐसा कहा नहीं जा सकता है। पार्टी के सांसद द्वारा ऐसे मुद्दों को याद दिलाने से नेकां की चुनौतियां बढ़ेंगी।

कल चुना जाएगा विपक्ष का नेता
भाजपा की ओर से श्रीनगर में 3 नवंबर को बुलाई गई विधायक दल की बैठक में विपक्ष का नेता चुनने की तैयारी है। इसके अगले दिन 4 नवंबर को श्रीनगर में ही सरकार का पहला सत्र शुरू हो रहा है। विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका अहम रहती है, जो सत्तापक्ष के एजेंडों पर अपनी बात रखता है। प्रदेशाध्यक्ष का कहना है कि हमारे सभी विधायक श्रीनगर में जा रहे हैं।
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संवेदनशील प्रस्तावों को लौटा सकते हैं उप राज्यपाल
विधानसभा में सामान्य तौर पर उप राज्यपाल को सरकार के प्रस्तावों को प्रस्तुत करना होता है, लेकिन अगर उमर सरकार अनुच्छेद 370 की बहाली, राज्या का दर्जा देने, दरबार मूव की बहाली जैसे संवेदनशील प्रस्तावों को लाती है तो उप राज्यपाल इसे लौटा सकते हैं। केंद्र में भाजपा सरकार और विपक्ष में मजबूत रूप से भाजपा के होने से सरकार के लिए ऐसे संवेदनशील प्रस्तावों को पास करना आसान नहीं होगा।
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