बलिदानी हेड कांस्टेबल बशीर अहमद: स्रोत पुलिस
जम्मू। आतंकियों से लोहा लेते हुए कठुआ में बलिदान हुए हेड कांस्टेबल बशीर अहमद जम्मू के छन्नी हिम्मत के रहने वाले थे। बशीर के चार बच्चे हैं। इनमें से एक बेटी और बेटे की शादी होने वाली थी। बशीर चुनाव के बाद घर आने वाले थे और धूमधाम से शादी करने की तैयारी थी, लेकिन घर आया तिरंगे में लिपटा शरीर।
बशीर के बलिदान से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। रविवार शाम को पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही हर तरफ चीख पुकार मच गई। हर किसी की आंख नम दिखी। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। इलाके के गणमान्य लोग भी इस मौके पर पहुंचे। बशीर के भाई शब्बीर का कहना है कि अभी कुछ दिन पहले ही बात हुई थी। बोल रहा था कि ड्यूटी कठुआ है, लेकिन अब थोड़ा आगे चला गया हूं। चुनाव के बाद घर लौटूंगा। बशीर के चार बच्चे हैं। दो बेटियां और दो बेटे। एक बेटी की शादी हो चुकी है। एक बेटे और एक बेटी की सगाई हो चुकी थी। ये भी बताया कि बहुत जल्द वह एएसआई बनने वाले थे। इसका वह कोर्स भी कर चुके थे।
एक के बदले दस आतंकी मारें, फिर मिलेगा सुकून
बशीर के भाई का कहना है कि सुरक्षाबल बशीर के बलिदान का बदला लें। एक के बदले 10 आतंकियों को मार गिराएं, तभी उनके भाई की आत्मा को सुकून मिलेगा। मेरा भाई बहुत बहादुर था। हमेशा आतंकरोधी अभियानों में आगे रहता था। कभी भी पीछे नहीं हटा। वह अपनी ड्यूटी को लेकर हमेशा तैयार रहता था। घर भी कम आता था।
बलिदान से पहले एलएमजी से आतंकी किया ढेर
डीजीपी आरआर स्वैन ने हेड कांस्टेबल बशीर अहमद के बलिदान पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूरा पुलिस महकमा परिवार के साथ खड़ा है। हम उनको वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करने और साहसी बशीर के बलिदान का बदला लेने का वचन देते हैं। बशीर अपने समुदाय और देशवासियों की रक्षा के लिए मौत से नहीं डरा और अपनी एलएमजी से विदेशी आतंकी को मौत के घाट उतार दिया।