जम्मू। केंद्र और प्रदेश के फेर में ओबीसी प्री-पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना फंस गई है। योजना 2020 से बंद है। बजट न मिलने के कारण प्रदेश में हर साल दो लाख से ज्यादा बच्चों को पढ़ाई में परेशानी आ रही है। पहले योजना के माध्यम से हर साल एक फार्म भरकर देना होता था। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का खर्चा केंद्र सरकार अदा करती थी। मगर अब योजना बंद है। बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है। योजना 2001 में शुरू हुई थी। 19 साल तक तो ओबीसी समुदाय के बच्चों ने लाभ लिया मगर अब नहीं ले पा रहे हैं।
योजना के तहत केंद्र सरकार 60 फीसदी तो प्रदेश सरकार 40 फीसदी बजट जारी करती थी। इससे बच्चे छात्रवृत्ति के जरिये पढ़ाई कर अपने सपने पूरे कर रहे थे। ओबीसी समुदाय के बच्चों को योजना के तहत 12वीं और इसके आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिलती थी। 2020 के बाद निरंतर ओबीसी समुदाय की तरफ से छात्रवृत्ति शुरू करने की मांग की जाती रही है, मगर बजट जारी नहीं हुआ है।
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बीएड कर रही हूं, नहीं मिल रही छात्रवृत्ति
बीएड कर रही शिवानी कटारिया ने कहा कि 12वीं कक्षा तक लाभ मिला है। इसके बाद नहीं। अगर छात्रवृत्ति मिलती है तो पढ़ाई करने में आसानी होगी। गौरव कटारिया ने कहा कि दसवीं कक्षा में पढ़ रहा हूं। छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया मगर मिली नहीं।
योजना के लाभ के लिए किया जा रहा संघर्ष
अखिल भारतीय अन्य पिछड़ा वर्ग के महासचिव बलवंत कटारिया ने कहा कि योजना का लाभ मिलना चाहिए। लंबे समय से योजना बंद है। इस कारण गरीब बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ओबीसी अधिकार तिरंगा यात्रा के समन्वयक बंसी लाल चौधरी ने कहा कि बच्चों को उनका हक मिलना चाहिए। समाज कल्याण विभाग को कई बार अवगत करवाया जा चुका है। स्पष्ट नहीं किया गया है।
अब कैसे हो रही पढ़ाई
ओबीसी समुदाय के बच्चे घर से खर्चा लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी परिवार है जो गरीबी रेखा में है। इन परिवारों के बच्चों को आगे की पढ़ाई में परेशानी आ रही है। ओबीसी समाज की अलग-अलग संस्थाएं भी अपने स्तर पर छात्रवृत्ति बच्चों को दे रही हैं।
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कोट
फंड न होने के कारण छात्रवृत्ति जारी नहीं हो रही है। कोशिश की जा रही है कि अगले साल से बहाल की जाए। मसला सरकार के ध्यान में लाया गया है।
-शीतल नंदा, आयुक्त सचिव, समाज कल्याण विभाग