जम्मू। उद्यमों को ऋण हासिल करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग खुले बाजार से अत्यधिक ब्याज दरों पर कर्जा लेने के लिए मजबूर हैं। जिन लोगों को वित्तीय सहायता की वास्तविक आवश्यकता होती है, उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि कम जरूरतमंदों को बार-बार ऋण सरकारी बैंकों से मिल रहे हैं। यह बात पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राहुल सहाय ने कही। उन्होंने व्यापार और उद्योग क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न सुझावों, सिफारिशों और मुद्दों को प्रस्तुत करने का अवसर देने के लिए आरबीआई जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के क्षेत्रीय निदेशक चंद्र शेखर आज़ाद के प्रति आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर उद्यमियों को आसान ऋण की सुविधा दी जाए। इससे जरूरतें पूरी हो सकेंगी। सहाय ने हालिया केंद्रीय बजट में एमएसएमई के लिए एक नए मूल्यांकन मॉडल की शुरुआत का स्वागत किया। यह मॉडल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बाहरी एजेंसियों पर निर्भर रहने के बजाय उनके डिजिटल पदचिह्न के आधार पर एमएसएमई व्यवसायों का मूल्यांकन करने में सक्षम होगा। राहुल सहाय ने कहा कि केंद्रीय बजट ने तनावग्रस्त खातों का समर्थन करने के लिए एक तंत्र भी पेश किया है। जिससे वित्तीय कठिनाई के दौरान एमएसएमई के लिए निरंतर बैंक ऋण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जम्मू में नशा मुक्ति केंद्रों को वित्तपोषित करने पर भी विचार किया जाए।