जम्मू। सरकारी कर्मचारियों की ओर से विभागीय मानदंडों का पालन नहीं करना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। खासकर तब तो बिल्कुल नहीं, जब संबंधित अधिकारी या कर्मचारी ने कोई बेईमानी करके आर्थिक लाभ न कमाया हो। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने एक मामले का फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की है।
मामला जम्मू-कश्मीर परियोजना निर्माण निगम (जेकेपीसीसी) के दो अधिकारियों से जुड़ा है। इसमें हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय के फैसले को पलटते हुए दोनों को राहत दी है। जेकेपीसीसी के दो अधिकारियों खिलाफ साल 2014 में विजिलेंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थीं। एफआईआर में आरोप लगाए गए कि दोनों अधिकारियों ने उत्तर वहनी में इलाके में बनने वाले एक पुल की पहले तकनीकि जांच नहीं की।
साथ ही पुल के डिजाइन को भी निदेशालय से अनुमोदित नहीं करवाया। दोनों की गलतियों की वजह से सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ है। मामले में दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तहत आरोप पत्र तैयार किया गया। साल 2022 में भ्रष्टाचार निरोधक न्यायाधीश, जम्मू की अदालत ने भी दोनों पर लगे आरोपों को सही माना।
जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए दोनों अधिकारियों ने हाईकोर्ट में अपील की। जिस पर फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश संजय धर ने कहा कि विभागीय मानदंडों का पालन न करना विभागीय जांच शुरू करने का कारण बन सकता है। जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि लोक सेवक ने अपने पद का दुरुपयोग करके अपने लिए कोई मूल्यवान वस्तु या आर्थिक लाभ प्राप्त किया है, तब तक पीसी एक्ट के तहत उसे आरोपी नहीं माना जा सकता।