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Jammu News: 1996 से पहले लागू एसआरओ 333 के तहत लाभ देने के निर्देश

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जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) जम्मू ने 1996 से पहले से लागू एसआरओ 333 के अनुसार लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया है। ये निर्देश राजिंदर सिंह डोगरा सदस्य (जे) और राम मोहन जौहरी सदस्य (ए) की पीठ ने जारी किया है।
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जम्मू-कश्मीर लद्दाख ऑल डिपार्टमेंट्स क्लेरिकल स्टाफ एसोसिएशन ने दायर याचिकाओं में दो अगस्त 2018 के एसआरओ को भावी प्रभाव के अनुदान की सीमा तक रद्द करने की मांग की। साथ ही लेखा संवर्ग, पशु/भेड़पालन संवर्ग पदों, पटवारियों और अनुभाग अधिकारियों की तरह 1996 से पहले से लागू एसआरओ के अनुसार लाभ प्रदान करने व 2003 से मौद्रिक लाभ देने के लिए प्रतिवादियों को निर्देश करने की मांग की थी।
कैट की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील वीनू गुप्ता और सरकार की ओर से एएजी सुदेश मगोत्रा और डिप्टी एजी दिवाकर शर्मा की दलीलें सुनीं और याचिका को स्वीकार किया। साथ ही आवेदकों के वेतनमान के उन्नयन को भावी प्रभाव देने की सीमा तक दो अगस्त 2018 के एसआरओ 333 को रद्द किया। प्रतिवादियों को लेखा संवर्ग, पशु/भेड़पालन संवर्ग पदों, पटवारियों और अनुभाग अधिकारियों की तरह एसआरओ 333 के अनुसार और 19 फरवरी 2003 से मौद्रिक लाभ देने का निर्देश दिया। कैट ने इस कार्य को तीन महीने की अवधि के भीतर पूरा करने का भी निर्देश दिया।
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कैट ने आगे कहा कि जैसा कि पहले से स्पष्ट है, कई पदों के वेतनमान पूर्वव्यापी प्रभाव से अपग्रेड किए गए थे, हालांकि, एसआरओ 333 के माध्यम से आवेदकों के वेतनमान को अपग्रेड करते समय प्रतिवादियों ने उसी को भावी प्रभाव दिया है, जो कार्रवाई भेदभावपूर्ण और मनमानी प्रकृति की है। प्रतिवादियों द्वारा दिया गया मुख्य तर्क यह है कि आवेदकों के वेतनमान के उन्नयन को पूर्वव्यापी प्रभाव देने से भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। कैट ने कहा कि यह खंडपीठ प्रतिवादियों द्वारा उठाए गए तर्कों से सहमत नहीं है। क्योंकि पटवारी, अनुभाग अधिकारी जैसे कई उच्च पदों के वेतनमान पूर्वव्यापी प्रभाव से अपग्रेड किए गए थे, जिससे निश्चित रूप से वित्तीय प्रभाव भी पड़ेगा, यहां आवेदकों के लिए विपरीत रुख नहीं अपनाया जा सकता है, जो जूनियर सहायकों जैसे निचले स्तर के पदों पर काम कर रहे हैं। इन टिप्पणियों के साथ कैट ने याचिका को अनुमति दे दी है।
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