नेकां चाहती है कि वे कश्मीर से किसी को एडवोकेट जनरल के लिए नियुक्त करने की सिफारिश करे। इस सूची में फारूक अब्दुल्ला को ईडी के मामले से छुटकारा दिलाने वाले शारिक जान, शारिक के पिता रियाज अहमद जान, इसाक कादरी पूर्व एडवोकेट जनरल, उमर अब्दुल्ला के दिल्ली में वकालत करने वाले दोस्त गौरव पचनंदा, जम्मू में एनसी के नेकां लीगल सेल के अध्यक्ष डी एस चौहान, रूपिंदर सिंह और अजय शर्मा के नामों पर चर्चा चल रही है। सूत्रों का ये भी कहना है कि राजोरी-पुंछ से 14 एडवोकेट नेकां के पास इस पद को देने की सिफारिश कर चुके हैं।
भाजपा के भी दावेदारइस पद के लिए भाजपा के पास भी कई दावेदार हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील सेठी यदि ये भाजपा की तरफ नामित विधायक नहीं बनते। आरएसएस से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल पंत का नाम भी इस पद के लिए चर्चा में है।
दोनों तरफ पसोपेश
दरअसल, एडवोकेट जनरल का पद राजनीतिक प्रवृति का रहा है। नई गठित होने वाली सरकार अपनी पसंद का एडवोकेट जनरल लगाती है। ताकि हाईकोर्ट में सरकारी मामलों की पैरवी और पक्ष वैसा ही रखा जाए, जैसा सरकार चाहे। लेकिन यूटी बनने से जम्मू कश्मीर में कई शक्तियां एलजी के पास हैं। कई शक्तियां सरकार के पास। हाईकोर्ट में सरकार की पैरवी दोनों ही अपनी तरह से चाहते हैं।विकल्प गैर राजनीतिक क्षेत्र का भी है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार और एलजी राजनीतिक बखेड़े में फंस चुके हैं। ऐसे में विकल्प ये भी तलाशा जा रहा है कि गैर राजनीतिक एडवोकेट जनरल हो। कुछेक नामों पर चर्चा चल रही है। जिन पर साझा सहमति बन सके। दस वर्ष तक रहे हैं डीसी रैनाबता दें कि 18 अक्तूबर को डीसी रैना ने एडवोकेट जनरल के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ये पद खाली है। रैना इस पद पर पिछले दस साल से तैनात थे। बीच में कुछ समय के लिए हटे थे।