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Jammu Kashmir: हाईकोर्ट में एडवोकेट की नियुक्ति पर खींचतान, एलजी और उमर की पसंद में अटका जनरल का चयन

Tue, 29 Oct 2024 12:57 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर लद्दाख हाईकोर्ट में एडवोकेट जनरल का पद खाली है, क्योंकि एलजी और उमर अब्दुल्ला की पसंद में मतभेद है। नेकां चाहती है कि उनकी पसंद का एडवोकेट जनरल बने, जबकि केंद्र सरकार अपनी मर्जी का एडवोकेट जनरल बनाना चाहती है। 
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एलजी मनोह सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्लाह - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर लद्दाख हाईकोर्ट पिछले 10 दिन से बिना एडवोकेट जनरल के है और ऐसा पहली बार हुआ है। यूं कहें कि इस पद पर नियुक्ति राजनीतिक पचड़े में फंस गई है। दरअसल, एडवोकेट जनरल हाईकोर्ट में सरकारी मामलों का पक्ष रखते हैं। नेकां चाहती है कि उनकी पसंद का एडवोकेट जनरल बने, जो सरकारी मामलों में सरकार का पक्ष रखे। वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय चाहता है कि उनकी मर्जी का एडवोकेट जनरल बने, ताकि सरकारी मामलों की पैरवी में केंद्र की चले। गृह विभाग है भी एलजी के पास। ऐसे में इस पद की नियुक्ति एलजी और उमर की पसंद में अटक गई है। इसी खींचतान में अब तक नियुक्ति नहीं हो रही। हालांकि नियुक्ति का अधिकार एलजी के पास है।

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जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 से पहले सेक्शन 42 के तहत एलजी सरकार की सिफारिश पर एडवोकेट जनरल नियुक्त करते थे। मंत्री परिषद इसकी सिफारिश करता था। पुनर्गठन होने के बाद सेक्शन 42 में संशोधन करते हुए सेक्शन 79 लाई गई। इस सेक्शन में एडवोकेट जनरल नियुक्त करने के अधिकार पूरी तरह से एलजी के पास हैं।

वे किसी सिफारिश के लिए बाध्य नहीं हैं। यदि एलजी के पास सरकार की तरफ से किसी एडवोकेट जनरल को नियुक्त करने की सिफारिश जाती भी है तो वे इसे खारिज कर सकते हैं। हालांकि सरकार और एलजी के बीच नियुक्ति के लिए मंथन किया जा रहा है।नेकां की चाहत कश्मीर से, जम्मू से भी कई दावेदार

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नेकां चाहती है कि वे कश्मीर से किसी को एडवोकेट जनरल के लिए नियुक्त करने की सिफारिश करे। इस सूची में फारूक अब्दुल्ला को ईडी के मामले से छुटकारा दिलाने वाले शारिक जान, शारिक के पिता रियाज अहमद जान, इसाक कादरी पूर्व एडवोकेट जनरल, उमर अब्दुल्ला के दिल्ली में वकालत करने वाले दोस्त गौरव पचनंदा, जम्मू में एनसी के नेकां लीगल सेल के अध्यक्ष डी एस चौहान, रूपिंदर सिंह और अजय शर्मा के नामों पर चर्चा चल रही है। सूत्रों का ये भी कहना है कि राजोरी-पुंछ से 14 एडवोकेट नेकां के पास इस पद को देने की सिफारिश कर चुके हैं। 

भाजपा के भी दावेदारइस पद के लिए भाजपा के पास भी कई दावेदार हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील सेठी यदि ये भाजपा की तरफ नामित विधायक नहीं बनते। आरएसएस से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल पंत का नाम भी इस पद के लिए चर्चा में है।

दोनों तरफ पसोपेश
दरअसल, एडवोकेट जनरल का पद राजनीतिक प्रवृति का रहा है। नई गठित होने वाली सरकार अपनी पसंद का एडवोकेट जनरल लगाती है। ताकि हाईकोर्ट में सरकारी मामलों की पैरवी और पक्ष वैसा ही रखा जाए, जैसा सरकार चाहे। लेकिन यूटी बनने से जम्मू कश्मीर में कई शक्तियां एलजी के पास हैं। कई शक्तियां सरकार के पास। हाईकोर्ट में सरकार की पैरवी दोनों ही अपनी तरह से चाहते हैं।विकल्प गैर राजनीतिक क्षेत्र का भी है। 
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सूत्रों का कहना है कि सरकार और एलजी राजनीतिक बखेड़े में फंस चुके हैं। ऐसे में विकल्प ये भी तलाशा जा रहा है कि गैर राजनीतिक एडवोकेट जनरल हो। कुछेक नामों पर चर्चा चल रही है। जिन पर साझा सहमति बन सके।  दस वर्ष तक रहे हैं डीसी रैनाबता दें कि 18 अक्तूबर को डीसी रैना ने एडवोकेट जनरल के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ये पद खाली है। रैना इस पद पर पिछले दस साल से तैनात थे। बीच में कुछ समय के लिए हटे थे।
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