जम्मू। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि कि उनकी सुरक्षा में लगे दो पीएसओ को निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कठुआ के बिलावर के भटौड़ी गांव के मक्खनदीन के परिवार से मुलाकात के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि सरकार को बिलावर के एसएचओ को निलंबित करना चाहिए था, जिसने इलाकों में वसूली का तंत्र चला रखा है।
मीडिया से बात करते हुए इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि नेकां सरकार, एलजी प्रशासन और केंद्र सरकार नहीं चाहती कि जम्मू-कश्मीर खुशहाल हो। एलजी प्रशासन ने मेरी सुरक्षा में लगे दो पीएसओ को निलंबित करने में आधा घंटा नहीं लगाया, लेकिन उन लोगों को निलंबित नहीं किया जा रहा है जिन्होंने प्रदेश में दहशत फैला रखी है। इल्तिजा ने कहा कि मेरे पीएसओ हमीद और बशर्त की कोई गलती नहीं है। उन्हें पता ने किस कारण से हटाया गया है।
उन्होंने कहा कि सोपोर में सैन्य जवान की तरफ से कथित तौर पर ट्रक चालक को मारने से लेकर मक्खनदीन की मौत पर बिलावर के एसएचओ पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के बारे में पूछे प्रश्न पर इल्तिजा ने कहा कि उनके बेटे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को कठुआ जाना चाहिए था। उमर अब्दुल्ला हर समय दिल्ली में बैठकर लंच करते हैं। बुद्धल से लेकर कठुआ तक के मामले में मुख्यमंत्री संजीदा नहीं रहे हैं। वो सिर्फ दिल्ली में लंच करते दिखते हैं। उन्होंने कहा कि मैं बिलावर के एसएचओ की दहशत को उजागर कर रही थी। इसके लिए पुलिस ने रविवार को मुझे नजरबंद किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीने में नेकां सरकार दिल्ली में जाकर मंत्रियों को सिर्फ शाॅल दे रही है। उन्होंने कहा कि बिलावर के मामले में न्यायिक जांच होनी चाहिए और एसएचओ निलंबित होना चाहिए।
नेकां का परिवार भी राजनीति में
इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि पहले नेकां और पीडीपी के नेताओं को नजरबंद किया जाता था, लेकिन नेकां की सरकार बनने के बाद बदलाव ये हुआ है नेकां के नेता नजरबंद नहीं होते हैं। पुलिस प्रशासन ने मंत्री जावेद राणा को बिलावर जाने दिया, लेकिन उन्हें रोका गया।