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Jammu News: देश में वैष्णो देवी के बाद बिलावर में 64 साल बाद मिला लुप्त हो रही प्रजाति का पेड़

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कठुआ। सदाबहार लगभग छह मीटर तक लंबा और सुर्ख लाल रंग के छोटे छोटे बेरनुमा फलों से लदा पेड़ एक बार फिर चर्चा में है। बिलावर के सुकराला वन क्षेत्र में वार्ड नंबर तीन में छह आईलेक्स एक्सेल्सा प्रजाति के 7 पेड़ खोजे गए हैं। खास बात यह है कि इससे पहले देश भर मे पहली बार इस पेड़ की प्राजाति को 64 साल पहले वैष्णो देवी क्षेत्र में भैरो घाटी के नजदीक देखा गया था। इतने लंबे अर्से के बाद जम्मू कश्मीर में इस प्रजाति का दोबारा पाया जाना वन संपदा के लिहाजा से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह खोज ट्री टॉक टीम और जम्मू विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग की ओर से की गई है।
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दरअसल, दुनिया में इस पेड़ से मिलती-जुलती 546 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसे होली ट्री के नाम से भी जाना जाता है। इनमें से एक प्रजाति को क्रिसमस पर सजाया भी जाता है। भारत में ऐसी 25 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। तीन प्रजातियां ऐसी हैं जो पूर्वी हिमालय और दक्षिणी भारत में पाई जाती हैं। आईलेक्स एक्सेल्सा प्रजाति को इंटरनेशनल यूनियन फार कंजरवेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने संक्रटग्रस्त श्रेणी में शामिल किया है।

स्थानीय स्तर पर कई नाम- चिउंडी, बट्टा, कटार
सेवानिवृत्त भारतीय वन अधिकारी ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि यह हरा भरा पेड़ चिउंडी, बट्टा, कटार जाईलॉस्मा लांगीफोलियम जैसा दिखता है। ऐसे सात पेड़ सुकराला से घट्ट गांव के बीच चीड़ वाले जंगल में सड़क किनारे नदी नाले के साथ पाए गए हैं। वनस्पति शास्त्र के विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों के मुताबिक इस पेड़ को 64 साल बाद दूसरी बार खोजा गया है।
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ओम प्रकाश शर्मा के साथ राकेश कुमार अबरोल, विवेक मोदी, सुनीत सिंह चौहान, साजन ठाकुर के जंगल दौरे के दौरान इन पेड़ों को खोजा गया है। इसके फलस्वरूप इस भूले बिसरे पेड़ को फिर से नई पहचान मिली। अब इस पर एक शोध पत्र जारी हुआ है। ओम प्रकाश ने बताया कि पेड़ की ऊंचाई पांच छह मीटर, छाल का रंग धूसर सफेद, छीलने पर छाल अंदर से सब्ज हरी, पत्ते दीर्घ आयताकार, नव कोंपलें लाल, फूल सफेद हरे छोटे छोटे, फल पकने पर चटक लाल होता है। स्थानीय गुज्जर बकरवाल लोग इस पेड़ को काटकर मवेशी को डालते देखे गये। कुछ वृद्ध बुजुर्गों ने इस दुर्लभ पेड़ का स्थानीय डोगरी नाम पोली बताया।
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