जम्मू। ऐसे उत्पाद जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग है। उन्हें वन जिला वन उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल किया जा सकता है। इससे रोजगार बढ़ेगा साथ ही आय में इजाफा होगा। यह बात कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) ने एक जिला एक उत्पाद के कार्यान्वयन की तैयारियों पर हुई समीक्षा बैठक में कही। एसीएस ने अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छे निर्यात और विपणन क्षमता वाले प्रत्येक जिले के उत्पादों की पहचान करने और अन्य विभागों से एक विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए। डुल्लू ने कई उत्पादों का सुझाव दिया जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग है। इसमें सेब, अखरोट, केसर, ट्राउट मछली, ऊन, रेशम, बासमती चावल, राजमाश, मसाले, काला जीरा, अनारदाना, शहद, बसोहली पेंटिंग और अन्य उत्पाद शामिल हैं। इनसे किसानों को भी आय होगी।
हर जिले में या दो से अधिक जिलों में एक साझा सुविधा केंद्र स्थापित किया जाएगा। जहां परीक्षण प्रयोगशालाएं, उत्पाद विकास केंद्र, प्रशिक्षण केंद्र और सामान्य कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
एसीएस ने समिति से सभी संबद्ध विभागों के परामर्श से जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। ओडीओपी योजना सभी किसानों और कृषि उद्यमियों को समान रूप से फायदा देगी। बैठक में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में खाद्य प्रसंस्करण असंगठित क्षेत्र है। इस योजना से इस क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा। जम्मू-कश्मीर में 144 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां हैं जो बड़े पैमाने पर असंगठित हैं। इसमें बेकरी उत्पादों, अचार, मसाले, जैम, जेली, जूस, शहद को शामिल किया जा सकता है।