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कश्मीर में टारगेट किलिंग आतंकियों की बौखलाहट

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जम्मू। कश्मीर में एक बार फिर से टारगेट किलिंग शुरू हुई है। 60 घंटों के भीतर आतंकियों ने कश्मीरी पंडित और दो बाहर के मजदूरों की हत्या कर दी यह आतंकियों की बौखलाहट है, जो कश्मीर में बदलते माहौल से पैदा हुई है। साथ ही कहीं न कहीं कश्मीर में खुफिया एजेंसियों का तंत्र भी कुछ हद तक फेल हुआ है। इस टारगेट किलिंग को वहां होने वाले विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। यह एक चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को और जोर लगाना होगा।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि कश्मीर में केंद्र की कई विकासशील योजनाएं चल रही हैं। जो आतंकी संगठनों को पच नहीं पा रहीं। इसलिए वह मजदूरों को मार रहे हैं, ताकि कश्मीर में होने वाले विकास कार्यों में शामिल मजबूर तबका वहां से भाग जाए। रही बात टारगेट किलिंग रोकने की तो इसका जवाब मौजूदा डीजीपी देंगे। वहीं बता सकते हैं कि इसे कैसे रोका जा सकता है। कश्मीरी पंडितों को मारने के पीछे तो उनका एक ही मकसद है कि जिहाद फैलाया जाए।
सेना के रिटायर कर्नल वीके साही का कहना है कि टारगेट किलिंग के जिम्मेदार वो लोग हैं, जो पाकिस्तान की पैरवी कर रहे हैं और उससे लगातार बात करने के लिए अपना भाषण देते हैं। आतंकवाद पर कसी गई लगाम और इनका समर्थन करने वालों पर कसा गया शिकंजा ही इस टारगेट किलिंग के पीछे का मकसद है। सरकार ने इनको मिलने वाला पैसा बंद किया है। इनका समर्थन करने वालों की आवाज बंद की है। इसी से यह लोग बौखलाहट में आकर ऐसा कर रहे हैं, लेकिन केंद्र को चाहिए कि अब कोई ठोस फैसला ले। कश्मीर पर पिछले 75 साल में बड़ा फैसला लेने से सरकारें घबराती रही हैं। एक बड़ा अभियान आतंकवाद को हटाने के लिए शुरू करना होगा, जिसका हो सकता है कि सरकार को नुकसान भी हो, लेकिन सरकारें या तो अपना हित देख लें या फिर एक बार ही कश्मीर में आतंकवाद का खात्मा।
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