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रोशनी घोटाला : दो साल बाद भी 18 केसों में सिर्फ दो की जांच पूरी हुई

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जम्मू। बहुचर्चित रोशनी घोटाले की जांच सीबीआई के पास जाने के बावजूद भी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। हालांकि सीबीआई को एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच ट्रांसफर करने का मकसद ही यहीं था कि इसकी जांच में तेजी आए। सीबीआई को जांच सौंपे जाने के 2 साल बाद भी घोटाले में दर्ज 18 एफआईआर में से सिर्फ 2 मामलों की जांच अब तक पूरी हुई है, जिनका कोर्ट में चालान पेश हुआ है। बाकी के मामलों की जांच अभी पूरी नहीं हुई।
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सूत्रों के मुताबिक कई बड़ी मछलियों के नाम इस घोटाले में हैं, जिनमें पूर्व मंत्रियों से लेकर अफसर तक शामिल हैं। ऐसे में इनको हाथ डालने से सीबीआई फूंक फूंक कर कदम रख रही है। सीबीआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि क्योंकि मामला काफी पुराना है और बड़े स्तर पर लोग शामिल हैं, इसलिए जांच में वक्त लग रहा है।
सेंक्शन के इंतजार में चालान
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने 18 में से 4 एफआईआर की जांच पूरी कर ली है, लेकिन संबंधित विभागों से सेंक्शन के इंतजार में यह चालान पेश नहीं हो पा रहे हैं, क्योंकि इन चालान में कई अफसरों के नाम भी शामिल हैं, जबकि कुछ पूर्व मंत्री भी हैं। इन पर कार्रवाई संबंधित विभाग से सेंक्शन मिलने के बाद ही की जा सकती है। इससे पहले सीबीआई ने रोशनी घोटाले में अब तक दो एफआईआर के चालान पेश किए हैं।
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मामले की जल्द जांच हो
रोशनी घोटाले को सीबीआई तक पहुंचाने वाले एडवोकेट अंकुर शर्मा का कहना है कि 2020 में हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच को सीबीआई के हवाले किया था, लेकिन जिस रफ्तार से इस मामले की जांच होनी चाहिए थी, उस तरह से नहीं हो रही। सीबीआई के पास एंटी करप्शन ब्यूरो से यह मामला इसलिए भेजा गया था, क्योंकि एसीबी इस मामले की जांच तेजी से नहीं कर रही थी। यहां तक कि लोगों को बचाने का प्रयास हो रहा था, लेकिन सीबीआई की जांच भी तेजी से नहीं हो पा रही। संबंधित विभाग सीबीआई को जरूरी और साफ सुथरे दस्तावेज नहीं महैया करवा रहा, जबिक अदालत ने साफ तौर पर कहा था कि संबंधित विभाग सीबीआई को जांच में पूरा सहयोग करेंगे। सीबीआई ने भी कोर्ट में कहा है कि संबंधित विभाग उन्हें सहयोग नहीं कर रहा।
25 हजार करोड़ रुपये का है घोटाला
एडवोकेट अंकुर शर्मा का कहना है कि यह घोटाला 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है। लिहाजा इस मामले की जांच जल्द होनी चाहिए। इस घोटाले में जम्मू के कई मंत्री, पूर्व अफसर तक शामिल हैं। कई भू माफिया शामिल हैं, जिन पर कार्रवाई जरूरी है।
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