जम्मू। झील एवं जल विकास प्राधिकरण कश्मीर के पूर्व अधिकारियों-कर्मियों पर भ्रष्टाचार का दर्ज मामला रद्द नहीं होगा। उच्च न्यायालय ने इसे लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश संजय धर ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई की।
उन्होंने कहा कि उक्त कानूनी स्थिति की पृष्ठभूमि में तत्काल मामले के तथ्यों का विश्लेषण करते हुए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने चालान की प्रति प्राप्त करने के लगभग 14 वर्षों के बाद अत्यधिक विलंबित स्तर पर इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता ने इन सभी वर्षों के लिए ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लिया है और गहरी नींद से जागने के बाद, अपनी पसंद, मौज और सनक के अनुसार देरी के लिए बिना किसी स्पष्टीकरण के इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस प्रकार कल्पना के किसी भी खिंचाव से यह नहीं कहा जा सकता है कि याचिकाकर्ता ने उचित समय के भीतर इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
अभियोजन पक्ष के साक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं और अब देर हो चुकी है। याचिकाकर्ता चाहता है कि यह न्यायालय सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करे जो मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के लिए अनिच्छुक होगा। इस प्रकार याचिकाकर्ता द्वारा किए गए प्रस्तुतीकरण के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना तत्काल याचिका अत्यधिक विलंबित होने के कारण खारिज की जाती है।
बता दें कि यह मामला झील एवं जल विकास प्राधिकरण कश्मीर के अधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का है। जो वर्ष 2000 में एंटी करप्शन ब्यूरो ने दर्ज किया था।
लापरवाही से मेटाडोर चलाने पर 3 साल की सजा
जम्मू। लापरवाही और रैश ड्राइविंग के मामले में कटड़ा उप न्यायाधीश मनोज परिहार ने एक मेटाडोर चालक को तीन साल की सजा सुनाई है। आरोप है कि वर्ष 2014 में कटड़ा के गांव कुंदरोरियां के रहने वाले सोहन सिंह ने लापरवाही से मेटाडोर चलाई। इसकी वजह से मेटाडोर में सवार पांच सवारियों की मौत हो गई। मंगलवार को मामले पर सुनवाई हुई। आरोपी मेटाडोर चलाते वक्त फोन कर रहा था और इसे गलत साइड पर ले गया। यदि वह वाहन/मैटाडोर को गलत दिशा में नहीं ले जाता तो दुर्घटना नहीं होती। यह परिस्थितियां यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त हैं कि आरोपी वाहन चलाने में लापरवाही का दोषी था। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने 3 साल के कारावास की सजा सुनाई।