जम्मू। कश्मीर की वुल्लर झील के संरक्षण के नाम पर सरकारी राशि व्यर्थ की जा रही है, जिस पर उच्च न्यायालय ने कड़ा एतराज जताया है। मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश मोक्षा खजूरिया काजमी ने इस मामले से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। खंडपीठ ने आदेश दिया कि संबंधित विभाग इसके संरक्षण पर अब तक खर्च किए गए 125 करोड़ रुपये का पूरा विवरण लेकर अदालत में पेश हों। अदालत ने इस मामले के लिए एक सहयोगी वकील को भी नियुक्त किया है, जिसको हर सुनवाई पर 10 हजार रुपये दिए जाएंगे।
न्यायालय ने कहा कि वह यह देखकर दुखी है कि सरकार ने एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए वूलर झील संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण बनाया है, लेकिन उक्त प्राधिकरण कहीं नजर नहीं आ रहा। बल्कि ऐसा लगता है कि स्वीकृत धन को बर्बाद किया जा रहा है। अब भी इस झील के 380 कनाल हिस्से पर अतिक्रमण है, जिसे हटाने के लिए काम किया जा रहा है। कोई भी प्राधिकरण किसी विशिष्ट समय सीमा के साथ आगे नहीं आ रहा है जिसके भीतर वे उक्त भूमि को पुन: प्राप्त करने का प्रस्ताव रखते हैं। 200 करोड़ सरकार ने इसके संरक्षण के लिए दिया है और इसमें से 125 करोड़ रुपये खर्च भी किए गए हैं। 33 गांवों के लोग इस झील में गंदगी फेंकते हैं, जिस पर कोई नजर नहीं रखी जा रही।
जेएंडके बैंक के पूर्व कोषाध्यक्ष पर पीएसए बरकरार
जम्मू। श्रीनगर की शालामार जेएंडके बैंक शाखा के पूर्व सहायक कोषाध्यक्ष फारूक अहमद मिसगर पर लगा पीएसए बरकरार रहेगा। मिसगर ने पीएसए के आदेश को उच्च न्यायालय की श्रीनगर विंग में चुनौती दी थी। इस पर न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर ने मंगलवार को सुनवाई की। बताया गया है कि आरोपी पर आतंकी संगठन टीआरएफ के लिए काम करने का आरोप है। तकनीकी इनपुट साफ कहते हैं कि याचिकाकर्ता पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेताओं के संपर्क में था और विभिन्न संचार तकनीकों के माध्यम से निर्देश ले रहा था जो एन्क्रिप्टेड थे और समझने में बहुत मुश्किल थे। अपीलकर्ता टीआरएफ का एक ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) था और टीआरएफ के आतंकियों को विभिन्न प्रकार की रसद सहायता प्रदान करने में सक्रिय रूप से शामिल था। इन आतंकियों ने कश्मीर के कई मजदूरों को मारा। वह टारगेट किलिंग करने वाले आतंकियों के लिए काम करता था। वह जम्मू-कश्मीर बैंक में कैशियर के रूप में काम कर रहा है और वह यह दावा नहीं कर सकता कि उसे पीएसए के आदेश वाले दस्तावेजों की भाषा समझ नहीं आई। इन दलीलों के साथ आरोपी की अर्जी को खारिज कर दिया।
नाबालिग से दुष्कर्म मामले के दो दोषियों को 8 साल जेल
जम्मू। नाबालिग का अपहरण और दुष्कर्म मामले में पीठासीन अधिकारी फास्ट ट्रैक कोर्ट जम्मू खलील चौधरी ने दो दोषियों को 8 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। 2014 में आरोनी गारू राम ने 10वीं में पढ़ने वाली छात्रा का पहले अपहरण किया और इसके बाद दुष्कर्म किया। दोषी के दूसरे सहयोगी सुनील कुमार को भी उक्त सजा सुनाई है। दोनों ने छात्रा को स्कूल से लौटते वक्त जबरदस्ती कार में बिठाया और अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया।