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प्रधानमंत्री ने नौशेरा के दो सपूतों को किया याद

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जम्मू। राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के राजोरी जिले के नौशेरा के दो सपूतों को भी याद किया। इन दोनों ने आजादी के बाद प्रदेश की धरती पर लड़ी लड़ाई में कम उम्र के बावजूद सेना की मदद की थी और विरोधियों को धूल चटाने में कामयाबी पाई थी।
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मोदी ने कहा कि मैं पिछले साल दीवाली पर जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में गया था। वहां मेरी मुलाकात बलदेव सिंह और बसंत सिंह नाम के ऐसे वीरों से हुई जिन्होंने आजादी के तुरंत बाद कश्मीर की धरती पर जो युद्ध हुआ था, उस युद्ध में बाल सैनिक की भूमिका निभाई थी। अभी तो इनकी उम्र बहुत बड़ी है तब वो बहुत छोटी उम्र के थे। हमारी सेना में पहली बार बाल सैनिक के रूप में उनकी पहचान की गई थी। उन्होंने अपने जीवन की परवाह न करते हुए उतनी कम उम्र में सेना की मदद की थी। इसी तरह हमारे भारत का एक और उदाहरण है- गुरु गोबिंद सिंह जी के बेटों का शौर्य और बलिदान। साहिबजादों ने जब असीम वीरता, धैर्र्य, साहस के साथ पूर्ण समर्पण भाव से बलिदान दिया था तब उनकी उम्र बहुत कम थी। भारत की सभ्यताएं, संस्कृति, आस्था और धर्म के लिए उनका बलिदान अतुलनीय है। साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में देश ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस की भी शुरुआत की है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के छोटे-छोटे बच्चों, बेटे-बेटियों ने हर युग में इतिहास लिखा है। हमारी आजादी की लड़ाई में वीरबाला कनकलता बरुआ, खुदीराम बोस, रानी गाइडिनिल्यू जैसे वीरों का ऐसा इतिहास है जो हमें गर्व से भर देता है। इन सेनानियों ने छोटी सी उम्र में ही देश की आजादी को अपने जीवन का मिशन बना लिया था। उसके लिए खुद को समर्पित कर दिया था।
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