जम्मू। कश्मीर हस्तशिल्प को अब विदेशों में भी बढ़ावा मिलेगा। कारिगरों की कमाई भी बढ़ेगी। हस्तशिल्प एवं हथकरघा कश्मीर के निदेशक महमूद अहमद शाह ने कॉंसुलेट जनरल आफ इंडिया (सीजीआई) डॉ. सुयाश चवान के साथ एक वेब बैठक में रोड मैप पर चर्चा की।
इस दौरान ऑनलाइन बैठक में जर्मन के बाजार और शेष यूरोप में कश्मीर के हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री के लिए निर्यात को बढ़ावा देने लिए चर्चा हुई। इससे उत्पाद विदेशों में जा सकेगा। जर्मनी कश्मीर कालीनों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इसके अलावा कश्मीर से चेन स्टिच, पेपर माची और अखरोट की लकड़ी के फर्नीचर का निर्यात होता है। जर्मनी में मौसम ठंडक भरा रहता है। इस दौरान कश्मीरी शॉल, कालीनों की मांग भी ज्यादा रहती है। इसके अलावा सोजनी, कानी शॉल, टोकरी बुनाई, लकड़ी की नक्काशी, चांदी और तांबे की नक्काशी, कालीन बुनाई, चमड़ा, रेशम और पश्मीना बुनाई समेत अन्य सामान निर्यात किया जा सकेगा।
हस्तशिल्प और हथकरघा की भागीदारी को आगामी एक्सपो और व्यापार शो में बढ़ाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरी कला को प्रदर्शित करने के अलावा बेचने के अवसर मिलेंगे। सीजीआई ने काउंसल हैंडल पर कश्मीरी शिल्प पर फिल्में और डिजिटल सामग्री को बढ़ावा देने का अनुरोध किया।