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बैंक मांग रहे किस्तें, दुकानदार बोले-एक माह दुकानें ही नहीं खुलीं तो कहां से दें

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जम्मू। कोरोना कर्फ्यू ने व्यापारियों की कमर ही तोड़कर रख दी है। एक माह तक दुकानें नहीं खुलने काफी घाटा झेलना पड़ा है। शहर में ही कारोबारियों को 100 करोड़ का नुकसान हो चुका है। दुकानों का किराया, बैंक की किस्तें, स्टोरों का किराया अदा करने के लिए पैसा नहीं हैं। अब दुकानें खुली हैं तो बेचने के लिए सामान ही नहीं है। दिल्ली समेत अन्य जगहों से बड़े व्यापारी सामान के लिए एडवांस मांग रहे हैं।
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व्यापारियों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि हर व्यापारी की दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद करे। इससे बोझ थोड़ा कम होगा। मौजूदा समय में कुछ दुकानदार किराये की दुकानें लेकर काम चला रहे हैं। अब दुकानें न खुलने से किराया अदा करने में दिक्कत आ रही है। इसी तरह जिन दुकानदारों ने सामान रखने के लिए स्टोर लिए हैं। स्टोरों का किराया कहां से अदा करें। फाइनेंस कंपनियों से लिए कर्ज की किस्तें नहीं दी जा रही हैं। बैंक से लोन की किस्तें भरने के लिए लगातार फोन आ रहे हैं। व्यापारियों ने कहा कि बीते साल लॉकडाउन के दौरान लोन की किस्तें बैंक ने नहीं ली थीं। इस बार भी ऐसा होना चाहिए। एक माह तक तो काम ही बंद रहा है।
कोट
बैंक दिए कर्ज की किस्तें मांग रहे हैं। एक माह तक दुकानें बंद रहीं। ऐसे में किस्तें अदा करने में दिक्कत आ रही है। बैंक की किस्ते पिछले साल की तरह माफ की जाएं। इससे राहत मिलेगी।
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- चंदन गुप्ता, अध्यक्ष, मोती बाजार एसोसिएशन
कई दुकानदारों ने फाइनेंस कंपनियों से भी कर्ज ले रखा है। अब रोस्टर में दुकानें खुलने से वैसे ही आय कम होगी। किस्तों का भुगतान कैसे करें। सरकार को दुकानदारों को वित्तीय सहायता देनी चाहिए।
- अनिल डढयाल, अध्यक्ष, पहाड़ियां मोहल्ला एसोसिएशन
कोरोना कर्फ्यू के चलते बाजारों का हाल सबके सामने है। कुछ बताने की जरूरत नहीं है। सरकार अपने स्तर पर व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता देे। इससे काफी राहत मिलेगी।
- सुभाष आनंद, अध्यक्ष, खिलौना बाजार एसोसिएशन
व्यापार आगे बढ़ाने में दिक्कत आ सकती है। वैसे ही दुकानें तीन दिन तक खुली हैं। अब बैंक किस्तें, फाइनेंस कंपनियों की किस्तें और अन्य खर्चे कहां से पूरे करेंगे। परिवार भी चलाना है। सरकार बैंक की किस्तें माफ करें।
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- काका, प्रधान, पुरानी मंडी बाजार एसोसिएशन
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