जम्मू। निजी ट्रांसपोर्टरों की प्रदेशव्यापी हड़ताल से शहर में और अंतर जिला रूट्स पर यात्री वाहनों के पहिए दिन भर थमे रहे। बसें और मेटाडोर न चलने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोग स्टॉपेज पर खड़े रहे लेकिन मेटाडोर नहीं पहुंची, उन्हें पैदल या ऑटो करके जाना पड़ा। शहर में सबसे ज्यादा परेशानी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पहुंचने वालों को हुई। जेकेआरटीसी की बसें तो चलीं, लेकिन इनकी संख्या कम होने से लोगों को कोई राहत नहीं मिल पाई। कई घंटे इंतजार के बाद लोगों को सरकारी बसें मिल सकीं। वहीं वीरवार को भी निजी बसें और मेटाडोर नहीं चलेंगी। 50 प्रतिशत किराया बढ़ोतरी को लेकर सरकार और ट्रांसपोर्टरों में कोई बातचीत नहीं हो पाई। ऑल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन टीएस वजीर ने कहा कि जब तक किराए में बढ़ोतरी नहीं होगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
मेटाडोर से भरी रहने वाली शहर की सड़कें बुधवार को सूनी-सूनी दिखीं। लोग रोजाना की तरह स्टॉपेज पर खड़े रहे लेकिन मेटाडोर नहीं पहुंची। इससे उन्हें पैदल या लिफ्ट लेकर गंतव्य की ओर रवाना होना पड़ा। कई लोग महंगा किराया देकर आटो में जाते दिखे। बनारस जाने वाले सोहन, राजेश, कमल और सोनू ने कहा कि हमें पता नहीं था कि आज मेटाडोर नहीं चलेगी। ऑटो वाला रेलवे स्टेशन तक के लिए दो सौ रुपये मांग रहा है। ऐसे में हमने पैदल ही जाने का फैसला किया हैै। धूप भी कम है, ऐसे में पैदल चलने में ज्यादा परेशानी भी नहीं होगी। निजी बसें और मेटाडोर मुख्य बस स्टैंड और वेयर हाउस स्थिति बस स्टैंड पर सारा दिन खड़ी रहीं।
बस स्टैंड पहुंचे, लेकिन बस नहीं मिली
डोडा जाने वाले सन्नी राजा ने कहा कि मुझे पता नहीं था कि अंतर जिला रूट पर भी बसें बंद हैं। मैं सुबह दस बजे बस स्टैंड पर पहुंचा तो यहां कोई बस नहीं थी। जेकेएसआरटीसी काउंटर पर गया तो पता चला एक बस थी जो सुबह सात बजे निकल गई है। ऑटो वाले जाने के लिए तैयार हुए, लेकिन किराया ज्यादा मांग रहे थे। सन्नी ने कहा कि जेकेएसआरटीसी को बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए, ताकि इन हालात में लोगों को परेशानी कम हो।
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आज काम पर नहीं पहुंच पाया
सतवारी में मेडिकल शॉप पर काम करने वालें संदीप कुमार ने कहा कि मेटाडोर नहीं चलने से वह बुधवार को काम पर नहीं जा सका। काफी समय तक सड़क पर जेकेएसआरटीसी बस का इंतजार किया, लेकिन नहीं आई। ऐसे में दुकान पर नहीं जा सका। उन्होंने कहा कि सरकार ट्रांसपोर्टरों से बात कर कोई रास्ता निकाले, ताकि हड़ताल का असर आम आदमी के कामकाज पर न पड़े।
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आज से शहर के सभी रूट पर चलेंगी जेकेआरटीसी की बसें
जम्मू शहर में जेकेएसआरटीसी की 20 इलेक्ट्रिक बसे चलती हैं। मेटाडोर की हड़ताल से बुधवार को इलेक्ट्रिक बसों के अलावा पांच बसें चलाई गई थीं, ताकि लोगों को परेशानी न हो। जेकेएसआरटीसी के अंतर जिला डिपों इंचार्ज विवेक हंस ने कहा कि बुधवार को रामनवमी की छुट्टी थी, इसलिए लोगों की संख्या थोड़ी कम थी। वीरवार से शहर में सभी रूट्स पर गाड़ियां चलाई जाएंगी, ताकि लोगों को कम परेशानी हो। उन्होंने कहा कि अभी जो सरकारी बसें अंतर राज्य रूट्स पर चलती थीं, उन्हें लोगों की मांग के हिसाब से शहर में और अंतर जिला रूट पर चलाया जाएगा।
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कोट
ट्रांसपोर्टरों से बातचीत हुई है, हमने उनसे समय मांगा है। कोई भी फैसला है सरकार इतनी जल्दी में नहीं कर सकती है। ऐसे में हमारी ट्रांसपोर्टरों से अपील है कि वह सरकार को कुछ वक्त दें ताकि उनकी मांगों पर कोई फैसला लिया जाए।
-प्रदीप कुमार, परिवहन आयुक्त
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कोट
हम 50 प्रतिशत यात्री क्षमता के साथ गाड़ियां नहीं चला सकते हैं। ऐसे हालात में गाड़ियां चलाना हमारे के लिए बहुत मुश्किल है। सरकार अगर 50 प्रतिशत यात्री किराये में बढ़ोतरी करती है तो हम गाड़ियां चलाने के लिए तैयार हैं। अगर ऐसे नहीं होता है तो हमारी हड़ताल जारी रहेगी।
-टीएस वजीर, चेयरमैन ऑल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन
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इसलिए ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर हैं
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सार्वजिनिक वाहनों को 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ चलाने का आदेश जारी किया है। सरकार के इस आदेश के खिलाफ ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर चले गए हैं। ट्रांसपोर्टर आदेश जारी रहने तक 50 प्रतिशत यात्री किराये में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों ने आरोप लगाया कि सरकार ने फैसला लेते समय उन्हें विश्वास में नहीं लिया।
50 प्रतिशत यात्रियों के साथ वाहन नहीं चला सकते : यूनियन
जम्मू। मिनी बस वर्कर यूनियन ने सरकार से वार्ता की पेशकश की। यूनियन अध्यक्ष विजय कुमार चिब ने कहा कि 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ हम वाहन नहीं चला सकते। अगर हम वाहन खड़े रखते हैं तो हमें उतना नुकसान नहीं है जितना चलाने से होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने ये आदेश जल्दबाजी और ट्रांसपोर्टरों को बिना विश्वास में लिए जारी किया है। सरकार को चाहिए था कि वह ग्राउंड पर काम करने वाले ट्रांसपोर्टरों से बातचीत करती और फिर कोई आदेश जारी करती। उन्होंने कहा कि हमारी हड़ताल जारी रहेगी। सरकार को चाहिए कि वह ट्रांसपोर्ट सेक्टर को आर्थिक संजीवनी दे ताकि हम लोगों की सेवा कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि जेकेआरटीसी की बसें पूरी क्षमता से परिचालन कर रही हैं, जबकि निजी ट्रांसपोर्टरों के लिए 50 प्रतिशत का आदेश थोपा गया है। ब्यूरो