बौद्ध धर्मगुरु और 14वें दलाईलामा ने कहा कि वे अभी 20 वर्ष और जीएंगे। बुद्ध दर्शन से सभी को अपने जीवन में उस संतुष्टि को प्राप्त करना चाहिए, जिससे हम अपने अंतिम समय में किसी पछतावे में न रहें। दलाईलामा रविवार को लेह के चोग्लामसर स्थित तिब्बत कम्युनिटी विलेज (टीसीवी) स्कूल में विद्यार्थियों और अनुयायियों को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान धर्मगुरु ने तिब्बत से निर्वासन और भारत में शरण के शरुआती दिनों से लेकर अब तक के सफर की यादें साझा कीं। दलाईलामा ने कहा कि वे अभी दो दशक और जीएंगे। सभी को आपस में एकजुटता बनाए रखने के साथ ही भीतर के बुद्ध को आत्मसात करना चाहिए। इससे पूर्व दलाईलामा का लद्दाख के पारंपरिक संगीत, गायन और नृत्य के साथ स्वागत किया गया।
रास्ते में हजारों अनुयायी धर्मगुरु की एक झलक पाने को बेताब नजर आए। बौद्ध अनुयायी अपने साथ खतक (सफेद रंग का पारंपरिक स्कार्फ) लेकर आए थे। वहीं, दलाईलामा के चोग्लामसर दौरे को लेकर लेह में यातायात को डायवर्ट किया गया। नागरिक और सैन्य वाहनों को चोग्लामसर रूट के बाहर से गुजरने की अनुमति दी गई।
जंस्कार दौरे की तैयारियां
दलाईलामा जल्द ही जंस्कार घाटी का दौरा करेंगे। इसके लिए प्रशासन और अनुयायियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जंस्कार में प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने आयोजन स्थल का निरीक्षण करने के साथ ही प्रस्तावित व्यवस्थाओं की समीक्षा की।