ऑक्सीजन कांसेंट्रेटर का प्रोटोटाइप और इस्माइल मीर...
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देश भर में कोरोना महामारी के दौरान इस लड़ाई में कई योद्धा सामने आए हैं जो अपना योगदान दे रहे हैं। ऐसे ही एक योद्धा कश्मीर के सीमावर्ती जिले बांदीपोरा से हैं। मोहम्मद इस्माइल मीर 60 साल के हैं, लेकिन उनका जज्बा बुलंद है और इसी दृढ़ता के चलते आज वह ऑक्सीजन कांसेंट्रेटर का एक प्रोटोटाइप तैयार करने में सफल हुए हैं। वे चाहते हैं कि कोई कंपनी सामने आए और किफायती कंसंट्रेटर बनाकर लोगों की जान बचाने में मदद करे।
मोहम्मद इस्माइल ने बताया कि जब कोरोना शुरू हुआ तब से ही वह कुछ न कुछ बनाते आए हैं। सबसे पहले 28 मार्च 2020 को उन्होंने डिसइंफेक्ट टनल का प्रोटोटाइप बनाया, उसके बाद टचलेस सैनिटाइजिंग मशीन तैयार की और फिर एक वेंटिलेटर। मीर ने बताया कि अब ऑक्सीजन के लिए चारो ओर हाहाकार मची है, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बाजार में एक से डेढ़ लाख रुपये में बिक रहे हैं। ऐसे में उन्होंने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बनाने की ठानी और एक सफल प्रोटोटाइप तैयार कर लिया।
उन्होंने बताया कि भले ही यह प्रोटोटाइप है, लेकिन वह काम पूरा कर रहा है। इसको बनाने के लिए कंप्रेसर, कूलिंग क्वाइल, रिजरवायर, 6 सोलिनाइड वाल्व, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट जियोलाइट का इस्तेमाल किया गया है। मीर ने बताया कि सबसे अहम भूमिका जियोलाइट की रहती है जो अशुद्ध गैसों को ब्लॉक करती है।
इस कंसंट्रेटर की खासियत यह है कि यह कम से कम 15 हजार में तैयार हो सकता है। मीर ने कहा कि इस महामारी के दौर में जहां इसको चीन जैसे देशों से आयात किया जा रहा है ऐसे में किसी कंपनी को सामने आना चाहिए और इस प्रोटोटाइप के आधार पर स्वदेशी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर तैयार करना चाहिए।
12वीं पास मीर नवोन्मेष से कर रहे हैरान
मोहम्मद इस्माइल मीर बांदीपोरा के वटपोरा गांव के रहने वाले हैं और केवल 12वीं पास हैं। लेकिन वह शुरू से अपने नवोन्मेष से सभी को हैरत में डालते रहे हैं। इसके चलते उन्हें अपना आईटीआई भी छोड़ना पड़ा। मीर ने कहा कि वे अपने शिक्षक से इतने सवाल करते थे कि बात कहासुनी पर पहुंच जाती। उन्हें क्लास से बाहर निकाल दिया जाता था। ऐसे में उन्होंने अपनी आईटीआई की पढ़ाई बीच में छोड़ दी।