दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के मुश्ताक अहमद डार ने बिजली और अन्य विभागों के कर्मचारियों के लिए ‘पोल प्रो’ नाम का पोल क्लाइंबर तैयार किया है। इस पोल क्लाइंबर के सहारे आसानी से बिना हाथ लगाए खंभों पर चढ़ सकते हैं। यह आकार में भी काफी छोटा है। इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान है। उन्हें भारी भरकम सीढ़ी अपने साथ ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अनंतनाग जिले के डूरु शाहाबाद के करीरी गांव के रहने वाले 40 वर्षीय मुश्ताक अहमद डार के इस नवाचार (इनोवेशन) के पेटेंट के लिए देश की कई कंपनियां संपर्क कर रही हैं। मुश्ताक ने बताया कि कश्मीर में खराब मौसम में बिजली की काफी दिक्कत रहती है। बिजली कर्मचारियों का काम आसान हो उन्हें दिक्कत न आए, इसी सोच के साथ पोल क्लाइंबर तैयार किया है।
मुश्ताक ने कहा कि इसे बनाने में नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) अहमदाबाद ने उनकी आर्थिक मदद की। इसके बाद इंडियन इनोवेटिक्स अहमदाबाद प्राइवेट लिमिटेड ने इस डिवाइस को बनाने का काम शुरू किया। इस कंपनी ने देश के कई हिस्सों में इस उत्पाद को लांच किया है और इसकी काफी मांग है।
इसके अलावा मलेशिया में भी इसका डेमो दिया गया है। वहां से भी इसकी काफी मांग आ रही है। मुश्ताक के अनुसार यह कंपनी 4 प्रतिशत रॉयल्टी उन्हें दे रही है। मुश्ताक के मुताबिक वर्ष 2007-08 में उन्होंने इसे बनाने का काम शुरू किया था। इसका प्रोटोटाइप बनाने में करीब एक साल लगा।
शुरू में पोल साइज एडजस्ट करने में दिक्कत आई। अब किसी भी खंभे पर बिना हाथ लगाए आसानी से चढ़ा जा सकता है। बिजली विभाग में इसकी काफी मांग है। इसे नारियल के पेड़ पर भी चढ़ने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें लगे सेफ्टी बेल्ट से खंभे के ऊपर हाथ छोड़कर आसानी से काम कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि शुरू में जब हमने इसका डेमो दिया तो बिजली विभाग ने इसकी मांग की। इसे इस तरह बनाया गया है कि इसमें करंट भी नहीं लगता है। मुश्ताक के अनुसार पैडमैन मूवी में भी इसका डेमो दिया गया है। इसके लिए उन्हें अभिनेता अक्षय कुमार ने 5 लाख रुपए से नवाजा था।
वॉलनट क्रेकिंग और पीलर मशीन भी बनाई
मुश्ताक अहमद डार की इनोवेशन में वॉलनट क्रैकिंग मशीन, वॉलनट पीलर, वॉशर और सॉर्टर (ग्रेडिंग) भी शामिल हैं। इन नवाचार ने अखरोट प्रोसेसिंग में शामिल लोगों की दिक्कतें दूर कर दी हैं। उन्होंने बताया कि वॉलनट पीलिंग मशीन करीब 20 हजार की है।
उन्हें वर्ष 2019 में 5 मशीनों का आर्डर आया था जबकि 2020 में 16, 2021 में 50 और 2022 में 110 का आर्डर आया था। यह मशीन दिन में करीब 60 हजार अखरोट छीलती है। पिछले दो वर्षों में 15 लाख का व्यवसाय किया है।
उन्होंने कहा कि वॉलनट कर्नल ग्रेडिंग मशीन जिससे अखरोट गिरी की ग्रेडिंग की जाती है उसे यहां के व्यवसायी बाहर से करीब ढाई लाख रुपये में खरीदते हैं। उसे उन्होंने केवल 40 हजार में ही तैयार कर दिया। एक महीने में अभी तक दो मशीनें बेच चुके हैं।
10वीं तक ही पढ़ पाए मुश्ताक
मुश्ताक अहमद डार ने मैट्रिक तक ही पढ़ाई की है। उन्होंने बताया कि जब वो मैट्रिक में थे तो उनके पिता का देहांत हो गया और घर के हालात के चलते पढ़ाई छोड़नी पड़ी। हालांकि उनमें कुछ कर दिखाने की चाह थी जिससे वो पीछे नहीं हटे।
मुश्ताक ने बताया कि इन मशीनों को बनाने के लिए कश्मीर में एक ही वर्कशॉप है - कम्युनिटी वर्कशॉप। जो एनआईएफ की मदद से तैयार की गई है। करीब 5-6 लोग उनकी इस वर्कशॉप में काम करते हैं।