रियासत में तेरह साल बाद हो रहे निकाय चुनाव में न अलगाववादियों के बहिष्कार का जादू चला और न ही आतंकियों की धमकी का असर। पाकिस्तान और पीओके से लगते इलाकों में पहले तीन चरणों में 70 फीसदी से अधिक मतदान हुआ। अवाम ने जम्हूरियत पर विश्वास जताकर पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि राज्य को अस्थिर करने की साजिश कामयाब नहीं होने पाएगी।
चाहे कश्मीर संभाग हो या फिर जम्मू संभाग सभी जगह सीमांत इलाकों में जमकर वोट डाले गए। कश्मीर के उड़ी, सुंबल, हंदवाड़ा तथा जम्मू संभाग के पुंछ, राजोरी, सुंदरबनी, आरएस पुरा, रामगढ़, अरनिया, बिश्नाह, नौशेरा सहित अन्य स्थानों पर निकाय चुनाव में काफी तादाद में लोग मतदान करने निकले। जम्मू संभाग के पुंछ, राजोरी, किश्तवाड़, डोडा, रामबन, बनिहाल आदि इलाके घाटी से लगते हैं। यहां अलगाववादियों के आह्वान का अमूमन असर देखने को मिलता है।
बंद तथा बहिष्कार के अलगाववादियों की कॉल को नजरअंदाज करते हुए 70 प्रतिशत से अधिक लोगों ने वोट डाले। सांबा तथा कठुआ जिला अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगता है। यहां के रामगढ़, हीरानगर, विजयपुर आदि निकायों में अच्छी तादाद में वोटिंग हुई। इसके साथ ही जम्मू जिले में पाकिस्तानी गोलाबारी का गवाह बनने वाले अरनिया, बिश्नाह, आरएसपुरा आदि सीमांत इलाकों में भी जमकर लोगों ने वोट डाले।
मुख्य चुनाव अधिकारी शालीन काबराने बताया कि पहले तीन चरण का चुनाव शांतिपूर्ण निकल गया है। जम्मू के अलावा घाटी में भी लोग मतदान करने निकले। लोगों ने लोकतंत्र पर विश्वास जताया है। उम्मीद है कि केवल घाटी में होने वाले आखिरी चरण में भी मतदाता निकलेंगे।