अपनी पार्टी को टूटने से बचाने के लिए जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती मुख्यमंत्री का पद छोड़ने तक को तैयार थी। विधानसभा भंग करने के फैसले से ठीक पहले अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा था कि गठबंधन का नेतृत्व हम करेंगे लेकिन हमारे में से नेतृत्व कौन करेगा यह अभी फैसला नहीं लिया गया है। नेकां के बाहरी समर्थन पर पूछने पर उन्होंने कहा कि इस पर अभी कोई विचार नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि हमारी ओर से राज्यपाल को लेटर भेजा गया लेकिन उसे कोई रिसीव नहीं कर रहा था। उन्होंने फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि हमारे लिए 35ए और विशेष दर्जा उनके लिए चिंता रही है। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई जनवरी में है। महबूबा ने कहा कि जब हम सरकार में थे तो हम उसका बचाव कर रहे थे और हमने उसके लिए अच्छे वकील भी नियुक्त किए थे।
लेकिन हमारे सरकार से हटने के बाद से कुछ सही होता नहीं दिख रहा और जैसे विशेष दर्जा का बचाव होना चाहिए था, वैसे नहीं किया जा रहा। महबूबा ने कहा कि कश्मीरियों ने उसके लिए कई शहादतें दी हैं और ऐसे हस्तक्षेप और संशोधन करने की कोशिश की जा रही है जो लोगों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता राज्य की विशेष स्थिति की रक्षा करना है इसलिए हमने एक साथ आने का फैसला किया।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से भाजपा मुख्यधारा के दलों के पीछे पड़ी हुई है उससे लगता है कि वे उन पार्टियों को हटाने की कोशिश कर रहे हैं जो राज्य में बड़ी कठिनाई और प्रयास के साथ लोकतांत्रिक रूप से स्थापित की गयी हैं। इसका मुकाबला करने के लिए हमने यह फैसला लिया। यह पूछे जाने पर कि सरकार गठन का फैसला किसका था, उन्होंने कहा कि यह तीनों दलों ने मिलकर सर्वसहमति से फैसला लिया था क्योंकि हमारी तरह नेकां और कांग्रेस भी 35ए को लेकर चिंतित थे।