फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीर : बढ़ते रेत-बजरी के दाम से घर बनाना हुआ महंगा, जानिए क्या हैं निर्माण सामग्री के रेट

Wed, 24 Mar 2021 11:56 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विज्ञापन

शहर में अब घर बनाना काफी महंगा पड़ रहा है। एक साल के भीतर निर्माण सामग्री के दाम चार गुणा बढ़ गए हैं। एक साल पहले जहां एक रेत-बजरी की ट्रैक्टर-ट्रॉली का रेट 1200 से 1500 रुपये के आसपास था। अब बढ़कर 4500 से 5000 रुपये तक पहुंच गया है। बख्शी नगर के रहने वाले गौरव ने बताया है कि उन्होंने हाल ही में घर बनाया है। दो साल पहले घर बनाने का काम शुरू किया था। उस वक्त रेत-बजरी की ट्रॉली 1200 रुपये के आसपास थी, लेकिन कारोना महामारी के बीच रेट बढ़ गए हैं।

विज्ञापन


ठेकेदार इसका कारण रेत-बजरी न मिलना बता रहा है। मोती बाजार की अमनदीप कौर ने बताया कि निर्माण सामग्री के रेट यकायक बढ़ रहे हैं। इस कारण घर बनाना मुश्किल हो रहा है। महंगाई यूं ही बढ़ती रही तो आम आदमी कभी भी घर नहीं बना सकेंगे। उधर, खनन विभाग के अनुसार जम्मू संभाग में 10 जगहों से रेत-बजरी उठाने की अनुमति है। इनमें जम्मू जिले के खौड़ और अखनूर शामिल हैं, इन्हीं जगहों से रेत-बजरी उठाई जा सकती है। अन्य किसी भी जगह से अनुमति नहीं है।

पहले नजदीकी नाले, दरिया से अवैध रूप से उठाई जाती थी रेत-बजरी
पहले तवी नदी समेत अन्य नालों में भी अवैध खनन होेता था। इस कारण नजदीकी जगहों से रेत-बजरी कम दरों में उठाई जाती थी। अब माइनिंग और उपायुक्त कार्यालय की सख्ती के कारण चिन्हित जगहों से ही रेत-बजरी उठाई जा सकती है, जहां पर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता हो। इस कारण भी दूर से रेत-बजरी लाने के लिए अतिरिक्त राशि वसूल की जा रही है।
विज्ञापन


शहर में नाले-नालियों और रास्तों का काम भी रुका
जम्मू शहर में रेत-बजरी के दाम बढ़ जाने से नाले-नालियों और रास्तों का काम रुक गया है। मोती बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदन गुप्ता, दीपक सोनी और सुनील गुप्ता के अनुसार ठेकेदारों का कहना है कि रेत-बजरी नहीं मिल पा रही है। बाजार में नाली खोदी गई है, लेकिन दो सप्ताह से काम बंद है। इस कारण आने-जाने में परेशानी हो रही है। इसी के साथ अन्य मोहल्लों में भी हालत ऐसी ही है। रेत-बजरी न मिलने का हवाला दिया जा रहा है। इससे विकास कार्य रुक गए हैं।

यह भी पढ़ें- डल झील में 70 फुट ऊंचा तिरंगा फहराकर घाटी के युवाओं ने पाकिस्तान को दिया जवाब, देखिए तस्वीरें

मिस्त्री और लेवर की दिहाड़ी भी बढ़ी
एक साल पहले मिस्त्री 550 रुपये दिहाड़ी ले रहे थे। अब इनकी दिहाड़ी 650 से 700 रुपये तक हो गई है। कुछ मिस्त्री 800 रुपये तक ले रहे हैं। इसके साथ लेवर की दिहाड़ी भी बढ़ी है। पहले 400 रुपये थी, अब 550 रुपये दिहाड़ी ली जा रही है।

जम्मू संभाग में 10 जगहों से रेत-बजरी उठाने की अनुमति है। इनमें खौड़ और अखनूर भी शामिल हैं। रेत-बजरी की कोई कमी नहीं है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और टिप्पर वाले पहले अवैध खनन कर रेत-बजरी उठा लेते थे। अब इस पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है। विकास कार्य और घर बनाने के लिए रेत बजरी की कोई कमी नहीं है। - अंकुर सचदेवा, खनन अधिकारी जम्मू
विज्ञापन


ये हैं निर्माण सामग्री के रेट (प्रति ट्रैक्टर-ट्रॉली)
सामग्री    अब के दाम    एक साल पहले

रेत           4500                1000 रुपये
बजरी        5000            1200 रुपये
पत्थर        5500             1500 रुपये
कंकरीट    6000              2000 रुपये

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें