निजी सुरक्षा एजेंसियों को लेकर गृह विभाग ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। आदेश के तहत कोई भी निजी सुरक्षा एजेंसी गार्ड या सुपरवाइजर के लिए सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की वर्दी का इस्तेमाल नहीं करेगी। यदि कोई ऐसा करता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ और कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
यहां तक कि वह इनकी वर्दी जैसी कोई पोशाक भी नहीं पहन सकता। न ही उनके किसी तमगे और अन्य निशान का इस्तेमाल करेगा। इसके लिए एक साल की सजा होगी और पांच हजार जुर्माना। अब तक ऐसा करने वालों को जुर्माना ही लगाया जाता था।
सूत्रों का कहना है कि कुछ निजी सुरक्षा एजेंसियों के गार्ड सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मिलती जुलती वर्दी पहन रहे थे। उनके सुपरवाइजर भी ऐसी वर्दियों और तमगों का इस्तेमाल कर रहे थे। इसकी आड़ में कुछ लोग गलत लाभ उठा रहे थे। इस पर संज्ञान लेते हुए गृह विभाग की रेगुलेशन अथारिटी ने उक्त आदेश जारी किया है।
गृह विभाग ने इसके अलावा सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी विभाग, संगठन, राज्य या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और बैंकों सहित निजी संस्थान जो निजी सुरक्षा एजेंसियों की सेवाएं ले रहे हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके यहां जो कोई भी गार्ड हो, वो इस तरह की वर्दी न पहने।
वर्दी खरीदने पर कोई रोक टोक नहीं
दूसरी तरफ बता दें कि जम्मू में 5 से 6 स्टोर पर पुलिस की वर्दी और अन्य सामान मिलता है। इसके अलावा जम्मू के रेलवे स्टेशन, सतवारी समेत करीब 30 से 40 दुकानों पर सेना और अर्धसैनिक बलों की वर्दी मिलती है। हैरानी की बात तो यह है कि कहीं पर भी इसकी खरीद पर रोक नहीं है। खासकर जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील प्रदेश में इसकी इस तरह से बिक्री होना खतरनाक साबित हो सकता है।
पूर्व में अधिकतर आतंकी हमलों में आतंकी सेना या पुलिस की वर्दी पहन कर आए और सैन्य कैंपों में घुसकर हमला कर गए। अभी कुछ दिन पहले दो फर्जी पुलिस अफसर पकड़े गए। जिन्होंने ज्यूल के एक स्टोर से वर्दी खरीदी थी। यहां तक कि आईपीएस का तमगा भी स्टोर से खरीदा।