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जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लगना तय

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रियासत में पिछले दो दिनों से तेजी से बदल रहे सियासी समीकरणों से राज्य में राज्यपाल शासन लगना लगभग तय हो गया है। उम्मीद है कि एक-दो दिनों में राज्यपाल शासन लग जाएगा। ताजा घटनाक्रम में उमर अब्दुल्ला ने कार्यकारी मुख्यमंत्री के रूप में कामकाज संभालने से इनकार कर दिया है।
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हालांकि, राज्यपाल की पीआरओ मृदु सलाथिया ने बताया कि उमर के कार्यकारी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने संबंधी कोई पत्र फिलहाल राजभवन को प्राप्त नहीं हुआ है। उधर, दिल्ली में राज्यपाल एनएन वोहरा ने गृह सचिव से मुलाकात कर राज्य में सरकार गठन को लेकर चल रहे गतिरोध की रिपोर्ट सौंप दी है।

गृह मंत्रालय रिपोर्ट का अध्ययन करने में जुट गया है। दिनभर चले तमाम उठापटक के चलते सियासी गलियारों में अब यह तय माने जाने लगा है कि सरकार बनाने की दिशा में किसी भी दल के पहल न करने के कारण उत्पन्न संवैधानिक संकट के चलते राज्यपाल शासन ही विकल्प बचता है।
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लंदन से वापस आकर म‌‌िले थे राज्यपाल से उमर

सूत्रों के अनुसार बुधवार को अस्वस्थ पिता का कुशलक्षेम पूछकर स्वदेश लौटे कार्यकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में राज्यपाल से मिलकर कार्यकारी मुख्यमंत्री के रूप में काम करने से इनकार कर दिया। इसके पीछे उन्होंने वजह बताई कि रियासत को पूर्णकालिक सरकार चाहिए जो बाढ़ पीड़ितों तथा पाक गोलाबारी से प्रभावित नागरिकों की मदद कर सके।

गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल की ओर से दिए गए रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। रिपोर्ट में राज्य के राजनीतिक हालात की चर्चा है। सूत्र बताते हैं कि राज्यपाल की राय पर गृह मंत्रालय एक दो दिनों में राज्यपाल शासन लगाने की राष्ट्रपति को सिफारिश कर सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के वीरवार को अहमदाबाद में होने की वजह से इस पर फिलहाल फैसला नहीं हो पाया है।

उधर, उमर तथा राज्यपाल दोनों के दिल्ली में होने की वजह से सियासी हलचल काफी तेज है। पीडीपी और भाजपा ने सरकार गठन के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस ने पहले ही पीडीपी को बिना शर्त समर्थन दे रखा है। नेकां ने पीडीपी को समर्थन दिया है, लेकिन अब तक पीडीपी ने इस पर कोई फैसला नहीं किया है।
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12 साल पहले भी सरकार गठन को लेकर हुआ था गतिरोध

इस बीच पीडीपी के प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि सरकार बनाने की दिशा में अभी कोई सकारात्मक पहल सामने नहीं है। विधानसभा चुनाव का परिणाम 23 दिसंबर को घोषित हुए एक पखवारे से भी अधिक समय बीत गया।

लेकिन अब तक कोई भी दल सरकार बनाने के लिए ठोस फार्मूला के साथ आगे नहीं आया। पीडीपी तथा भाजपा के नेताओं ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने के बाबत बात की थी, लेकिन एक सप्ताह बीत जाने पर भी कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया।

रिसासत में 12 साल पहले भी सरकार गठन पर वर्ष 2002 में इसी प्रकार के गतिरोध उप्पन्न हुए थे। पीडीपी और कांग्रेस की ओर से सरकार बनाने में देरी पर तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. फारुक अब्दुल्ला ने कार्यकारी मुख्यमंत्री के रूप में काम करने से इनकार कर दिया था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हस्तक्षेप किया था, लेकिन फारुक तैयार नहीं हुए। इसके बाद 18 अक्टूबर को राज्यपाल शासन लगा दिया गया था।
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