मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) श्रीनगर ने गुजरात के एक व्यक्ति द्वारा दायर जमानत अर्जी पर आदेश के लिए सुरक्षित रखा, जिसने गिरफ्तारी से पहले इस महीने की शुरुआत में सुरक्षा प्रतिष्ठान को पीएमओ का अधिकारी होने का विश्वास दिलाया था और सभी प्रोटोकॉल का लुत्फ उठाया। गुजराती किरण पटेल और अभियोजन पक्ष के वकील को सुनने के बाद, सीजेएम राजा मोहम्मद तसलीम ने मामले को 23 मार्च को आदेश के लिए रखा।
किरण पटेल के वकील ने तर्क दिया कि अपराध उनके मुवक्किल के खिलाफ गंभीर नहीं हैं, अभियोजन पक्ष ने जांच के इस स्तर पर उन्हें जमानत देने का विरोध किया। गुजरात के रहने वाले किरण पटेल ने प्रधानमंत्री कार्यालय में एक अतिरिक्त निदेशक (रणनीति और अभियान) के रूप में अपने आपको पेश किया और अन्य आतिथ्य के अलावा बुलेटप्रूफ कार और सुरक्षा कवर सहित कई भत्तों का आनंद लिया।
किरण पटेल कश्मीर घाटी के अपने तीसरे दौरे पर था, जब दो मार्च को सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें श्रीनगर के निशात इलाके में एक पांच सितारा होटल से पकड़ा।
पुलिस ने पूरे प्रकरण में किसी भी तरह की खुफिया विफलता से इंकार किया है, लेकिन इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा के साथ फील्ड अधिकारियों को चूक के लिए दोषी ठहराया है।
एडीजीपी विजय कुमार ने इसको लेकर कहा कि इस मामले में एक उचित प्राथमिकी हुई है। देखिए, जब श्रीनगर पुलिस को 2 मार्च को सूचना मिली तो एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एक टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। फर्जी विजिटिंग कार्ड बरामद किए गए हैं। गंभीर पूछताछ की गई। वह 14 दिनों तक पुलिस हिरासत में रहा। वह फिलहाल न्यायिक रिमांड में है। वह पूरी तरह से जेल में है। उन्होंने कहा कि हम पेशेवर तरीके से जांच कर रहे हैं। हम गुजरात पुलिस की मदद ले रहे हैं और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
गृह मंत्रालय के स्पष्ट दिशानिर्देशों के बारे में पूछे जाने पर कि मौखिक निर्देश पर किसी को भी सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए। एसओपी शुरू से ही है। निर्देश समय-समय पर आते हैं। पुलिस मौखिक निर्देश पर किसी को सुरक्षा मुहैया नहीं कराये। जो गलती हुई है, उस पर गौर किया जा रहा है और निर्देश देने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।