राज्य सरकार जेके बैंक को विधायिका के दायरे में लाने के फैसले पर पुनर्विचार करेगी। बैंक का बोर्ड उससेे जुड़े सभी निर्णयों को लेने तथा कार्यान्वित करने का उपयुक्त मंच है। इस मोर्चे पर कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलने आए बैंक कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान की स्वायत्तता और संचालन स्वतंत्रता की रक्षा करना राज्य प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है। कर्मचारियों को किसी भी परिस्थिति में उनके रोजगार, भविष्य की संभावनाओं या वेतन संरचना के बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए।
राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि जहां तक पीएसयू मामले का सवाल है तो आरबीआई जम्मू एंड कश्मीर बैंक का नियमन एक पुरानी पीढ़ी के निजी क्षेत्र के बैंक की तरह करता है। इसका नियमन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज द्वारा किया जाता है क्योंकि कंपनी कानून के तहत यह एक सरकारी कंपनी है। सेबी इसका नियमन एक सूचीबद्ध कंपनी के तौर पर करता है। आरबीआई, सेबी और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज द्वारा इसका नियमन जारी रहेगा। इसमें न तो कोई बदलाव किया जा रहा है और न ही ऐसा कोई विचार है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर बैंक कंपनी अधिनियम के तहत एक सरकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत है। पीएसयू शब्द का कोई कानूनी अर्थ नहीं है। यह एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है। इसमें कोई नया बदलाव नहीं किया जा रहा है। एक सरकारी कंपनी के रूप में बैंक सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण है। इसलिए यह आरटीआई के पारदर्शिता प्रावधानों के अधीन है। इस संबंध में कुछ नया लागू नहीं किया जा रहा है। यह लंबी अवधि में बैंक के लिए पारदर्शिता अच्छी है।