जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों का रिपोर्ट कार्ड बुधवार को पेश किया। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (एसकेआईसीसी) में बुधवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली का मीडिया जम्मू कश्मीर को इतने नकारात्मक तरीके से पेश करता है कि बहुत तकलीफ होती है।
कश्मीर में अगर एक आदमी मरता है तो दो हफ्ते तक खबर नहीं उतरती लेकिन मेरे जिले में रोज पांच आदमी मरते हैं, यहां किसी पर्यटक पर पत्थर नहीं फेंका जाता लेकिन मेरे मुजफ्फरनगर-सहारनपुर हाइवे पर लगभग हफ्ते में एक बार जरूर पर्यटकों को लूटा जाता है।
उन घटनाओं का कभी कोई जिक्र नहीं होता लेकिन कश्मीर के माहौल को खराब करने के लिए और यहां के पर्यटन क्षेत्र को खत्म करने के लिए ऐसा किया जाता है।
मलिक ने कहा कि सही बात तो यह है कि जो राज्य व मुल्क पर्यटन पर निर्भर करते हैं उनको मारने का एक रास्ता उनके पर्यटन को खत्म कर दें। ऐसा मिस्र में एक प्रयास हुआ था। सकारात्मक ढंग से इसे पेश कर राज्य की मदद करें।
एक साल के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि एक साल में हमारे तीन मुद्दे थे-सुशासन, स्वराज और सशक्तिकरण उन्हें पूरा करने का प्रयास किया। हमने सबसे पहले आते ही हमने पंचायती चुनावों को करवाने की बात रखी। प्रोटोकॉल तोड़ते हुए दो मुख्यधारा के घर गया और सबसे अच्छी बात तो यह रही कि डॉ फारूक अब्दुल्ला इन जगहों पर उनके साथ खड़े रहे।
यह सिर्फ इसलिए था कि गांवों में एक नई लीडरशिप बनेगी और जो पैसे केंद्र से आएगा उससे गांव देहातों में तरक्की भी होगी। लेकिन उसमें न सिर्फ आतंकवादियों और अलगाववादियों की ओर से बहिष्कार किया गया, बल्कि मुखधारा के दो मुख्य राजनीतिक दलों ने भी इसमें हिस्सा लेने से इंकार कर दिया गया।
हिम्मत न हारते हुए चुनाव करवाए गए और खुशी की बात यह रही कि 74 प्रतिशत मतदान देखने को मिला। शांतिपूर्वक ढंग से बिना किसी नुकसान के पंच सरपंच चुने गए। हमारे जिले में पंचायत के चुनावों के दौरान 2-4 लोग तो मर ही जाते हैं।